छत्तीसगढ़ ब्रेकिंग – गुरुजन अब शिक्षा दिलाएंगे या सड़क बनाएँगे?
बलरामपुर/सूरजपुर: एक तरफ सरकारें शिक्षा के बड़े-बड़े वादे करती हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत कुछ और ही है। बलरामपुर और सूरजपुर जिलों को जोड़ने वाली ग्राम पंचायत खोखनिया की मुख्य सड़क की दुर्दशा ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अब गुरुजनों को बच्चों को पढ़ाने के बजाय सड़कों की मरम्मत करनी पड़ेगी?

शिक्षा के पथ पर कीचड़ और गड्ढे
खोखनिया की यह सड़क सालों से जर्जर अवस्था में है। बारिश के मौसम में तो यह कीचड़ और गहरे गड्ढों के कारण मौत का जाल बन जाती है। इस सड़क से गुजरना हर किसी के लिए एक जोखिम भरा काम है। इसी रास्ते से होकर शिक्षक रोज़ाना स्कूल पहुंचते हैं ताकि वे बच्चों के भविष्य को संवार सकें। लेकिन, इस रास्ते पर सफर करना उनके लिए किसी जंग से कम नहीं है।

स्थानीय लोगों ने कई बार पंचायत से लेकर जिला प्रशासन तक इस सड़क की मरम्मत के लिए गुहार लगाई, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला। प्रशासन और संबंधित विभाग की घोर लापरवाही के कारण यह समस्या जस की तस बनी रही, जिससे लोगों का धैर्य जवाब दे गया। वही पूर्व डिप्टी CM टी .एस .सिंहदेव ने इस गंभीर समस्या को देखते हुए सोशल मीडिया में पोस्ट कर सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
जब गुरुजनों ने उठाया फावड़ा
आखिरकार, बच्चों की शिक्षा बाधित न हो और वे सुरक्षित स्कूल पहुंच सकें, इस चिंता ने शिक्षकों को खुद ही मैदान में उतरने के लिए मजबूर कर दिया। उन्होंने किसी और के भरोसे बैठने के बजाय श्रमदान करने का फैसला किया। हाथ में फावड़े और तसले लेकर, ये गुरुजन गड्ढों को भरने और कीचड़ को हटाने में जुट गए। यह दृश्य न केवल प्रेरणादायक था, बल्कि हमारे प्रशासनिक तंत्र की विफलता को भी उजागर कर रहा था।

यह घटना सिर्फ एक सड़क की कहानी नहीं है, बल्कि एक ऐसी तस्वीर है जहाँ नागरिक, खासकर शिक्षक, अपनी और दूसरों की जिंदगी बेहतर बनाने के लिए खुद ही प्रयास कर रहे हैं, जबकि सरकार और प्रशासन मौन हैं। यह हमारे देश की प्राथमिकताओं पर एक बड़ा सवाल है: क्या यही है सरकार का विकास मॉडल – जहाँ बच्चों का भविष्य संवारने वाले गुरुजनों को ही सड़कें भी संवारनी पड़ें?

