EXCLUSIVE: माना जवाहर नवोदय विद्यालय में “दबंग” अध्यापक का आतंक: छात्रों से मारपीट, अवैध जमीन पर कब्जा और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
छत्तीसगढ़ – राजधानी रायपुर के प्रतिष्ठित जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV), माना में एक अध्यापक के कथित दबंगई और आपराधिक गतिविधियों ने शिक्षा जगत को शर्मसार कर दिया है। अध्यापक डी.के. सिंह पर न केवल छात्रों के साथ मारपीट और धमकी देने का आरोप है, बल्कि उनकी पुरानी करतूतें, जिनमें ज़मीन हड़पने और भ्रष्टाचार जैसे गंभीर मामले भी सामने आ रही हैं। इस पूरे प्रकरण में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि प्रिंसिपल का कथित संरक्षण होने के कारण उन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
पिस्तौल दिखाकर धमकाना और छात्रों से मारपीट
विद्यालय के सूत्रों के अनुसार, पिछले दो महीनों में डी.के. सिंह ने करीब 15 छात्रों को बेरहमी से पीटा है। उनके इस हिंसक व्यवहार से बच्चे इतने भयभीत हैं कि उनके माता-पिता भी शिकायत करने से डर रहे हैं। यह भी पता चला है कि वे एक लाइसेंसी पिस्तौल रखते हैं और इसका इस्तेमाल अक्सर छात्रों और साथी शिक्षकों को डराने-धमकाने के लिए करते हैं। उनके इस अत्याचारी रवैये ने पूरे विद्यालय में दहशत का माहौल बना दिया है।

प्राचार्य का ‘कथित संरक्षण’ या मिलीभगत?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि डी.के. सिंह को इतनी खुली छूट कैसे मिली हुई है? आरोपों के मुताबिक, उन्हें प्राचार्य लक्ष्मी सिंह का पूरा संरक्षण प्राप्त है। इस संरक्षण के पीछे किसी पुराने रिश्ते या समझौते का संदेह जताया जा रहा है। विद्यालय परिसर में फैली चर्चाओं के अनुसार, प्राचार्य की मिलीभगत के कारण ही डी.के. सिंह के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही, जिससे उनका दुस्साहस बढ़ता जा रहा है।
दुर्ग से रायपुर तक आपराधिक गतिविधियों का सिलसिला
डी.के. सिंह की आपराधिक गतिविधियों की शुरुआत माना से नहीं हुई। दुर्ग में अपनी पिछली पोस्टिंग के दौरान भी वे सुर्खियों में रहे थे। उस समय उन पर भोले-भाले ग्रामीणों को अवैध तरीके से ब्याज पर पैसे देने और जब वे कर्ज नहीं चुका पाते थे, तो बंदूक की नोक पर उनकी जमीनें हड़पने का आरोप था। उनका यह “बाहुबली” रूप रायपुर आने के बाद भी जारी रहा। हाल ही में, उन्होंने वीआईपी रोड पर एक जमीन पर अवैध कब्जा करने की कोशिश की थी। इस मामले में जमीन मालिक ने उनके खिलाफ माना थाने में शिकायत भी दर्ज कराई थी, और यह मामला हाईकोर्ट तक पहुँचा था। हालाँकि, डी.के. सिंह ने अपनी पहुंच का इस्तेमाल कर इस मामले को भी “सेटिंग” के जरिए दबा दिया।

विद्यालय की संपत्ति का ‘खुलेआम बंदरबांट’
हाल ही में हुए एक नए खुलासे ने विद्यालय प्रशासन पर और भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि डी.के. सिंह, प्राचार्य लक्ष्मी सिंह और एक अन्य कर्मचारी एल.एन. साहू की मिलीभगत से विद्यालय का कई टन स्क्रैप औने-पौने दामों में बेचकर हड़प लिया गया। यह सरकारी संपत्ति का खुलेआम दुरुपयोग और एक बड़ा वित्तीय घोटाला है, जो दर्शाता है कि शिक्षा के इस मंदिर में भ्रष्टाचार किस हद तक फैला हुआ है।
सूत्रों के मुताबिक डी.के. सिंह पर शराब का आदी होने के भी आरोप हैं, जिससे उनका व्यवहार और भी अनियंत्रित हो जाता है। उनके आतंक से न केवल छात्र बल्कि शिक्षक और शिक्षिकाएं भी पीड़ित हैं। यह मामला अब केवल एक व्यक्ति के दुर्व्यवहार का नहीं, बल्कि एक पूरे सिस्टम के फेल होने का उदाहरण है, जहाँ शिक्षा देने वाला ही अपराधियों की तरह व्यवहार कर रहा है। प्रशासन और शिक्षा विभाग को इस मामले पर जल्द से जल्द कड़ा रुख अपनाना चाहिए ताकि छात्रों को इस दहशत से मुक्ति मिल सके और विद्यालय की गरिमा बहाल हो सके।

