भारतमाला फर्जीवाड़ा:15 अगस्त तक जांच रिपोर्ट अनिवार्य, नहीं तो अफसरों पर होगी कार्रवाई-संभागायुक्त महादेव कांवरे
छत्तीसगढ़ – रायपुर संभाग में भारतमाला प्रोजेक्ट से जुड़े मुआवजा फर्जीवाड़े की 164 शिकायतों की जांच अब निर्णायक मोड़ पर है। लंबे समय से जांच में हो रही देरी को लेकर संभागायुक्त महादेव कांवरे ने अफसरों को तलब किया और साफ कहा कि 15 अगस्त तक हर हाल में जांच रिपोर्ट सौंपनी होगी। दो बार समय सीमा बढ़ाने के बावजूद रिपोर्ट पूरी नहीं होने पर अब सख्त रुख अपनाया गया है।
संभागायुक्त ने कहा कि यदि तय समय सीमा तक सभी शिकायतों की रिपोर्ट नहीं मिली, तो संबंधित जांच अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। जांच समिति के सदस्यों ने आरोप लगाया कि उन्हें जांच के लिए आवश्यक दस्तावेज तहसील स्तर से नहीं मिल पा रहे हैं। इस पर संभागायुक्त ने सभी एसडीएम को निर्देश दिए कि वे बिना किसी देरी के दस्तावेज उपलब्ध कराएं। यदि लापरवाही जारी रही, तो एसडीएम पर भी कड़ी कार्रवाई होगी।
अब जांच समिति के सदस्यों को निर्देश दिया गया है कि वे हर एक शिकायत की व्यक्तिगत रिपोर्ट तैयार करें, जिससे यह स्पष्ट हो कि किन शिकायतों में फर्जीवाड़ा हुआ है और किन मामलों में नहीं। साथ ही, यह भी दर्ज किया जाए कि किस शिकायत का कैसे निराकरण किया गया है। इस पारदर्शी प्रक्रिया के तहत फर्जी मुआवजा प्राप्त करने वालों की पहचान की जाएगी।
भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत अधिग्रहण की गई जमीनों के बदले दिए गए मुआवजे में बड़े पैमाने पर अनियमितता की शिकायतें सामने आई थीं। इस कारण सरकार ने चार जांच समितियों का गठन किया था। अब इन समितियों से अपेक्षा है कि वे विस्तृत जांच कर दोषियों की सूची सौंपें ताकि प्रशासनिक जवाबदेही तय हो सके और आम जनता का विश्वास बहाल रहे।
संभागायुक्त की यह सख्ती स्पष्ट संदेश है कि छत्तीसगढ़ सरकार भ्रष्टाचार को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं करेगी। फर्जी मुआवजा पाने वालों पर कार्रवाई के साथ-साथ लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी। यह कदम जनहित में उठाया गया प्रशासनिक निर्णय है, जो भविष्य में ऐसे घोटालों पर लगाम लगाने में सहायक होगा।

