विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह के क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था लचर, डॉ. चेतन साहू की लापरवाही से गई एक जान!
रिपोर्टर : शशिकांत सनसनी
राजनांदगांव – मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चिकित्सकीय लापरवाही का एक और गंभीर मामला सामने आया है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खुलती नजर आ रही है, जहां डॉ. चेतन साहू और जूनियर डॉक्टर पराग मेश्राम की लापरवाही के चलते एक डायरिया पीड़ित युवती की मौत हो गई।
मृतक का परिचय:
मृतका: हेमलता सिन्हा (उम्र 18 वर्ष)
पता: करमतरा, अंबागढ़ चौकी क्षेत्र,अस्पताल में भर्ती: 16 जुलाई, रात 11 बजे,मौत: 17 जुलाई, सुबह 8:15 बजे
⚠️ लापरवाही के गंभीर आरोप:
युवती को उल्टी-दस्त, पेट दर्द और लो ब्लड प्रेशर की शिकायत थी।
केजुअल्टी में भर्ती के बाद ड्यूटी पर मौजूद जेआर डॉ. पराग मेश्राम को फोन पर सूचना दी गई, लेकिन वे नहीं पहुंचे।
ऑन-कॉल एसआर डॉ. चेतन लाल साहू को भी सूचित किया गया, परंतु उन्होंने न मरीज को देखा और न फोन उठाया।
📞 डॉ. चेतन साहू ने फोन रिसीव नहीं किया:
सनसनी न्यूज़ ने डॉ. चेतन साहू के मोबाइल नंबर 7987964104 पर तीन बार कॉल किया, लेकिन फोन रिसीव नहीं किया गया।
सवाल उठता है कि क्या डॉक्टर ड्यूटी पर थे या निजी अस्पताल में व्यस्त?
प्रबंधन की कार्रवाई:
28 जुलाई को दोनों डॉक्टरों को शो-कॉज नोटिस जारी किया गया।
जवाब के लिए तीन दिन की मोहलत दी गई है।
एमसीएच अधीक्षक डॉ. अतुल मनोहर वेशकर ने इसे “गंभीर लापरवाही” बताते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है।
रिकॉर्ड की गड़बड़ी:
मरीज के केस टिकट में कोई क्लिनिकल नोट्स दर्ज नहीं किया गया है।
इसे कर्तव्य उल्लंघन और प्रशासनिक चूक माना गया है।
जांच की मांग और सामाजिक दबाव:
परिजनों के साथ-साथ कई सामाजिक संगठनों ने इस मामले को मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया तक ले जाने की तैयारी की है।
सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह मामला भी जांच के नाम पर ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
❓ जनता के सवाल:
क्या “कलयुग के भगवान” कहे जाने वाले डॉक्टर अब भी भरोसेमंद हैं?
क्या मेडिकल कॉलेज अस्पताल सिर्फ नाम का “कॉलेज” बनकर रह गया है?
क्या सिस्टम में बैठे अधिकारी दोषियों को बचाने की कोशिश करेंगे
अब तक की स्थिति:
जांच कमेटी गठित, जवाब तलब की प्रक्रिया जारी
पीड़ित परिवार को अब भी इंसाफ का इंतजार
सामाजिक संगठनों का दबाव बढ़ता जा रहा है
अब सवाल यह नहीं है कि युवती की मौत कैसे हुई, सवाल यह है कि क्या डॉक्टर की ड्यूटी से भागने की कीमत एक जान है? यदि इस केस में भी न्याय नहीं हुआ, तो यह पूरे स्वास्थ्य तंत्र की साख पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करेगा।

