प्रधानमंत्री आवास के नाम रेत माफिया करोडो रूपये का किया रेत डंप,कलेक्टर से शिकायत पर कार्यवाही नहीं, ग्रामीणों में भारी आक्रोश
रिपोर्टर – शशिकांत देवांगन (सनसनी)
राजनांदगाँव– करीब पांच सौ ट्रैक्टर रेट एक ही ग्राम पंचायत के बिना कोई बड़े विकास निर्माण की स्वीकृति के जमा होना असाधारण बात नहीं है। इसमें बड़े पैमाने पर रेत डंप होने की सूचना प्रशासनिक अधिकारी को बार-बार दिए जाने के बाद भी जांच नहीं की जा रही है ग्रामीण बता रहे हैं कि पंचायत मुख्यालय ग्राम बुद्धभरदा व उसके आश्रित ग्राम कविराज टोलागाँव में रेत गांव से लगे पैरी नदी से चार माह पहले निकाल कर मुनाफा के पूरी उद्देश्य भंडारी की गई है उक्त दोनों गॉवो के अलावा शहर के आउटर में भी जगह-जगह रेत डंप रखा गया है।

गौरतलब है कि जिले लिए रेत को लेकर सियासी दाव पेच हफ्तों पहले से चल रहा हैं। यह मुद्दा शहर के मोहड वार्ड में शिवनाथ नदी से अवैध रेत उत्खनन और परिवहन रोकने पहुंचे ग्रामीणों पर गोलियां चला देने की बाद से मामला गरमाया हुआ है हालांकि पुलिस ने अब तक के गोली कांड में लिप्त 8 आरोपियों को गिरफ्तार करें चुके हैं। लेकिन मुख्य आरोपी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।
लेकिन विपक्ष कांग्रेस ने मोहड़ के मामले को लेकर सत्ता पक्ष भाजपा को घेरने की खूब कोशिश की कांग्रेस की नेताओं का कहना था कि भाजपा मुख्य आरोपी को संरक्षण दे रही है इसलिए पुलिस मुख्य आरोपी को अब तक गिरफ्तार नहीं कर सकती है उल्लेखनीय है कि मोहड़ गोली कांड को लेकर जिले के आधिपत कांग्रेसी विधायक मानसून सत्र में मोहड गोलीकांड को लेकर प्रश्न उठाने वाले हैं।

दूसरी और डोंगरगांव विधानसभा क्षेत्र में जहां लगातार कांग्रेस के ही विधायक दलेशश्वर साहू है वहां बड़े पैमाने पर ट्रंप रेत को लेकर सवाल उठ खड़े हैं ग्रामीणों द्वारा बार-बार जांच की मांग किए जाने के बाद भी खनिज अधिकारी व राजस्व अधिकारी जांच नहीं कर रहे हैँ भंडारीत के रेत की जांच को लेकर कांग्रेस- भाजपा दोनों के नेता चुप्पी साधे हुए हैं जानकारी मिली है कि मुख्यमंत्री सहायक अनुशासन तिहार के दौरान भी ग्रामीण उक्त डंप रेत की जांच की मांग कर चुके हैं गांव के सूरज, दुर्गा,दिलीप बाबन,अंजलि घसिया, लालेश सहित ग्रामीणों ने संयुक्त हस्ताक्षित पत्र में कलेक्टर व खनिज अधिकारी से उक्त भारी पैमाने पर डंप रेत की जांच और अवैध पाए जाने पर दोषि लोगों के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की है इसके बावजूद भी जांच करने में प्रशासनिक अधिकारी क्यों रुचि नहीं दिख रहे यह बड़ा सवाल है।

वही रेत माफिया प्रधानमंत्री आवास के बहाना दिखा कर रेत की चोरी कर गाँव में डंप कर करोडो रूपये कमा रहे हैं। और ग्रामीणों को अधिक कीमत में रेत बेच रहे हैँ वही ग्रामीण शिकायत कर थक गए हैं।जिससे ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति काफ़ी आक्रोश बना हुआ हैं।
साथ रेत डंप पर प्रशासन क्यों कार्यवाही नहीं कर पा रही हैं। किसके आदेश का इंतजार कर रहा है। फिलहाल देखना होगा की डंप रेत पर कब प्रशासन शिकांजा कस पायेगा ये देखनी वाली बात होंगी।

