खबर का असर- सिविल अस्पताल माना में मरम्मत कार्य के लिए बजट प्रस्ताव की मांग
रायपुर :- भूपेश एक्सप्रेस न्यूज की खबर का असर हुआ है, जिससे जिला प्रशासन ने आवश्यक कदम उठाने का निर्णय लिया है। अब देखना यह है कि बजट स्वीकृति के बाद इन कार्यों को कब तक पूरा किया जाएगा और इससे मरीजों को कितना लाभ होगा। रायपुर जिला प्रशासन ने सिविल अस्पताल माना और राखी में आवश्यक मरम्मत और उन्नयन कार्य के लिए बजट प्रस्ताव की मांग की है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने संचालक स्वास्थ्य सेवाएं छत्तीसगढ़ को पत्र लिखकर सिविल अस्पताल माना में सीपेज मरम्मत, आंशिक प्लंबिंग और विद्युतीकरण कार्य के लिए 28.08 लाख रुपये और सिविल अस्पताल राखी में आंतरिक और बाहरी क्षेत्र में रंग-रोगन कार्य के लिए 30.62 लाख रुपये की मांग की है।

आवश्यक बजट:
- सिविल अस्पताल माना: 28.08 लाख रुपये
- सिविल अस्पताल राखी: 30.62 लाख रुपये
- कुल आवश्यक बजट: 58.70 लाख रुपये (28.08 + 30.62)
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि कार्यपालन अभियंता, सीजीएमएससी लिमिटेड रायपुर द्वारा विस्तृत प्राक्कलन प्रस्तुत किया गया है। अब देखना यह है कि बजट स्वीकृति के बाद इन कार्यों को कब तक पूरा किया जाएगा और इससे मरीजों को कितना लाभ होगा¹।
जानिए क्या था पूरा मामला
रायपुर 10 करोड़ से अधिक की लागत से बने रायपुर के माना सिविल अस्पताल की हालत इन दिनों बेहद खराब हो गई है। अस्पताल की टाइल्स जगह-जगह से निकलकर गिर रही हैं, जिससे किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। यह अस्पताल लगभग 8 साल पहले बनाया गया था और अब इसकी दीवारें और फर्श जर्जर हो चुके हैं।
माना सिविल अस्पताल में न केवल माना कैंप के लोग इलाज के लिए आते हैं, बल्कि आसपास के करीब दो दर्जन गांवों के मरीज भी इसी अस्पताल पर निर्भर हैं। यहां तक कि एयरपोर्ट, पुलिस ट्रेनिंग स्कूल (PTS), बटालियन, बालगृह और अन्य सरकारी संस्थानों के कर्मचारी भी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए इसी पर भरोसा करते हैं।
अस्पताल में हाईटेक आई हॉस्पिटल भी है, जो दूर-दराज के मरीजों को भी आकर्षित करता है। यहां नेत्र रोगों के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन भवन की खस्ताहाल स्थिति मरीजों और स्टाफ दोनों के लिए खतरा बनती जा रही है।
अस्पताल प्रशासन ने इस समस्या को लेकर अपने उच्च अधिकारियों को पहले ही अवगत करा दिया है। हालांकि अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है। स्थानीय लोगों में नाराजगी है कि करोड़ों की लागत से बनी स्वास्थ्य सुविधा का यह हाल क्यों हो रहा है।
माना सिविल अस्पताल की दुर्दशा यह सवाल उठाती है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे की देखरेख और मरम्मत को लेकर प्रशासन कब जागेगा?

