May 7, 2026

BSP की जमीन पर अवैध फैक्ट्री संचालन का आरोप, कोंडेकसा के ग्रामीणों ने खोला मोर्चा; राज्यपाल के आदेशों की अनदेखी का दावा

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रिपोर्ट – शशिकांत सनसनी

दल्लीराजहरा – दुर्ग जिले के कोंडेकसा गांव में संचालित जगन्नाथ स्टील पावर प्लांट को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। भिलाई स्टील प्लांट (BSP) की भूमि पर संचालित इस निजी फैक्ट्री के खिलाफ ग्रामीणों ने धरना शुरू कर दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह प्लांट बिना वैध अनुमति और नियमों का पालन किए संचालित किया जा रहा है तथा प्रशासन शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं कर रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार जिस जमीन पर यह प्लांट स्थापित है, वह जमीन आजादी के बाद क्षेत्रीय विकास और औद्योगिक विस्तार के उद्देश्य से भिलाई स्टील प्लांट (SAIL) को सौंपी गई थी। आरोप है कि अब उसी भूमि का उपयोग निजी कंपनी द्वारा किया जा रहा है, जबकि भूमि हस्तांतरण और उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया विधिसम्मत तरीके से नहीं की गई।

कोंडेकसा गांव के लोगों का कहना है कि प्लांट के संचालन के लिए न तो स्पष्ट वैध लाइसेंस उपलब्ध है और न ही कृषि भूमि को औद्योगिक उपयोग में परिवर्तित करने की प्रक्रिया पूरी की गई है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन और संबंधित विभागों को कई बार शिकायतें दी गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

धरने पर बैठे ग्रामीणों ने कहा कि फैक्ट्री संचालन के कारण गांव का वातावरण प्रभावित हो रहा है। भारी वाहनों की आवाजाही, धूल और प्रदूषण से आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र की मूल पहचान खेती और ग्रामीण जीवन रही है, लेकिन अब उद्योग के नाम पर गांव के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया है।

मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब श्रमिकों ने भी प्लांट प्रबंधन पर श्रम कानूनों के उल्लंघन का आरोप लगाया। मजदूरों का कहना है कि उन्हें प्रतिदिन केवल 300 से 400 रुपये तक मजदूरी दी जा रही है, जबकि यह राशि न्यूनतम मजदूरी मानकों से काफी कम है। श्रमिकों ने आरोप लगाया कि उन्हें सुरक्षा उपकरण, स्वास्थ्य सुविधाएं और श्रमिक अधिकारों के अनुरूप सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि यह क्षेत्र पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है, जहां आदिवासी और ग्रामीण समुदायों के अधिकारों की विशेष संवैधानिक सुरक्षा का प्रावधान है। इसी को लेकर ग्रामीणों ने राज्यपाल के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया था। बताया जा रहा है कि राजभवन की ओर से मामले में कार्रवाई के निर्देश भी जारी किए गए थे, लेकिन स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों ने उन निर्देशों पर अमल नहीं किया।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि राज्यपाल के आदेशों की अनदेखी कर प्रशासन फैक्ट्री प्रबंधन को संरक्षण दे रहा है। इसको लेकर गांव में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। धरने पर बैठे लोगों ने कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
इस आंदोलन को फॉरवर्ड डेमोक्रेटिक लेबर पार्टी (FDLP) का भी समर्थन मिला है। पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिव शंकर सिंह गौर और प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र कुमार साहू धरना स्थल पहुंचे और ग्रामीणों को समर्थन दिया। शिव शंकर सिंह गौर ने कहा कि यदि फैक्ट्री का संचालन नियमों और कानून के अनुरूप नहीं पाया गया तो ग्रामीणों के साथ मिलकर तालाबंदी की जाएगी।

उन्होंने कहा, “शासन और प्रशासन को महीनों पहले इस मामले से अवगत कराया गया था, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। जब सरकार जनता की बात सुनना बंद कर देती है, तब लोगों को सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ता है।”

प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र कुमार साहू ने कहा कि यह लड़ाई केवल एक फैक्ट्री के खिलाफ नहीं, बल्कि ग्रामीणों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की लड़ाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि उद्योगों और निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए गांव और किसानों के हितों की अनदेखी की जा रही है।

धरना स्थल पर बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए फैक्ट्री संचालन पर तत्काल रोक लगाने, भूमि दस्तावेजों की जांच कराने और श्रम कानूनों के उल्लंघन की निष्पक्ष जांच की मांग की।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे फैक्ट्री के मुख्य गेट पर तालाबंदी करेंगे और आंदोलन को जिलेभर में फैलाया जाएगा।

फिलहाल इस पूरे मामले में स्थानीय प्रशासन या फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन कोंडेकसा में शुरू हुआ यह आंदोलन अब जिले में बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बनता जा रहा है।

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