छत्तीसगढ़ में नए PCCF के चयन को लेकर हलचल तेज, आज DPC बैठक में लग सकती है मुहर,1994 बैच के IFS अधिकारी अरुण पांडे सबसे मजबूत दावेदार
रायपुर – छत्तीसगढ़ के वन विभाग में शीर्ष स्तर पर बड़ा प्रशासनिक फैसला होने जा रहा है। प्रदेश के नए प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) के चयन को लेकर राजधानी रायपुर में हलचल तेज हो गई है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आज विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित होने जा रही है, जिसमें वन विभाग के नए मुखिया के नाम पर अंतिम मुहर लग सकती है।
वन विभाग और प्रशासनिक गलियारों में इस बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे आने वाले वर्षों के लिए प्रदेश की वन नीति, जैव विविधता संरक्षण, वन्यजीव प्रबंधन और इको टूरिज्म की दिशा तय होगी। सूत्रों के अनुसार, 1994 बैच के वरिष्ठ IFS अधिकारी अरुण पांडे इस पद के लिए सबसे मजबूत दावेदार के रूप में उभरकर सामने आए हैं।
अरुण पांडे को वन विभाग के भीतर एक अनुभवी, व्यवहारिक और दूरदर्शी अधिकारी के रूप में जाना जाता है। उन्होंने अपने लंबे प्रशासनिक कार्यकाल में छत्तीसगढ़ के लगभग सभी प्रमुख वन सर्कलों में जिम्मेदारियां संभाली हैं। फील्ड स्तर की गहरी समझ, प्रशासनिक क्षमता और योजनाओं को जमीन पर उतारने की कार्यशैली ने उन्हें विभाग के सबसे सक्षम अधिकारियों में शामिल किया है।
वन विभाग से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि वर्तमान समय में छत्तीसगढ़ को ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जो केवल प्रशासनिक अनुभव तक सीमित न हो, बल्कि पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास जैसे विषयों की भी व्यापक समझ रखता हो। अरुण पांडे इन सभी मानकों पर खरे उतरते दिखाई देते हैं।
विशेष रूप से इको टूरिज्म के क्षेत्र में उनके कार्यों की काफी चर्चा रही है। उन्हें छत्तीसगढ़ में इको टूरिज्म मॉडल को नई पहचान देने वाला अधिकारी माना जाता है। उनके मार्गदर्शन में प्रदेश में 146 इको टूरिज्म साइट्स की पहचान की गई, जिनमें प्राकृतिक सौंदर्य, वन्यजीव, जल स्रोत और आदिवासी संस्कृति को केंद्र में रखकर विकास की रूपरेखा तैयार की गई।
इन प्रयासों का उद्देश्य केवल पर्यटन बढ़ाना नहीं था, बल्कि स्थानीय समुदायों को रोजगार से जोड़ना, जंगलों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और प्रकृति आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करना भी था। वन विभाग के कई अधिकारी मानते हैं कि अरुण पांडे ने इको टूरिज्म को “राजस्व और संरक्षण” दोनों के संतुलित मॉडल के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रभावी काम किया।
क्लाइमेट चेंज यानी जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर विषय पर भी उनकी गहरी पकड़ मानी जाती है। बदलते पर्यावरणीय हालात, वन संरक्षण की आधुनिक चुनौतियां और कार्बन संतुलन जैसे विषयों पर उन्होंने विभागीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण पहलें आगे बढ़ाई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में वन विभाग की भूमिका केवल जंगलों की सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जलवायु संतुलन और पर्यावरणीय स्थिरता में भी उसकी बड़ी जिम्मेदारी होगी। ऐसे में अनुभव और विजन वाले नेतृत्व की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है।
वन विभाग के भीतर अरुण पांडे की छवि एक शांत, समन्वयवादी और परिणाम आधारित अधिकारी की रही है। अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच उनकी कार्यशैली को सकारात्मक माना जाता है। विभागीय समन्वय, योजनाओं की मॉनिटरिंग और फील्ड अमले के साथ बेहतर संवाद उनकी कार्यप्रणाली की विशेषता रही है।
सूत्रों के अनुसार, आज होने वाली DPC बैठक में PCCF पद के लिए विभिन्न पहलुओं पर चर्चा होगी, लेकिन विभाग के अंदर और प्रशासनिक स्तर पर अरुण पांडे के नाम को लेकर मजबूत सहमति बनने की संभावना जताई जा रही है। यदि उनके नाम पर अंतिम मुहर लगती है तो इसे वन विभाग में स्थिर और अनुभवी नेतृत्व की दिशा में बड़ा कदम माना जाएगा।
छत्तीसगढ़ देश के उन राज्यों में शामिल है जहां विशाल वन क्षेत्र, समृद्ध जैव विविधता और आदिवासी जीवन का प्रकृति से गहरा संबंध है। ऐसे राज्य में PCCF की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। वन संरक्षण के साथ-साथ मानव और वन्यजीव संघर्ष, अवैध कटाई रोकना, जंगल आधारित आजीविका को बढ़ावा देना और इको टूरिज्म के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना आने वाले समय की प्रमुख चुनौतियां होंगी।
इसी वजह से आज की DPC बैठक पर पूरे प्रशासनिक और वन विभाग की नजरें टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि नए PCCF के चयन के साथ ही विभाग को नई दिशा और नई ऊर्जा मिल सकती है। वहीं यदि अरुण पांडे के नाम पर सहमति बनती है तो यह उनके लंबे अनुभव, कार्यकुशलता और दूरदर्शी सोच पर एक बड़ी मुहर मानी जाएगी।

