सुकमा-दंतेवाड़ा में जल जीवन मिशन का असर, केंद्र के वरिष्ठ अधिकारी ने की सोलर जल योजनाओं की खुलकर सराहना
रायपुर – छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल से एक सकारात्मक और उत्साहजनक खबर सामने आई है, जहां भारत सरकार के अतिरिक्त सचिव एवं राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के संचालक कमल किशोर सोन ने सुकमा और दंतेवाड़ा जिले के दूरस्थ क्षेत्रों का दौरा कर जल आपूर्ति व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने सोलर आधारित जल योजनाओं और पेयजल आपूर्ति व्यवस्था की जमकर सराहना की।
01 मई 2026 को सुकमा प्रवास के दौरान सोन ने ग्राम पंचायत दुब्बाटोला के आश्रित ग्राम फायदागुड़ा में स्थापित सोलर ड्यूल पंप का निरीक्षण किया। इस परियोजना के माध्यम से ग्रामीणों को भीषण गर्मी में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान जिला प्रशासन और तकनीकी अधिकारियों की टीम भी मौजूद रही, जिनमें कलेक्टर, अतिरिक्त मिशन संचालक ऑकेश चन्द्रवंशी, मुख्य अभियंता जी.एल. लखेरा, अधीक्षण अभियंता कैलाश मढ़रिया सहित अन्य अधिकारी शामिल थे।

निरीक्षण के दौरान केंद्र सरकार के अधिकारियों ने जल जीवन मिशन के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों की गुणवत्ता और प्रभावशीलता की प्रशंसा की। उन्होंने विशेष रूप से सौर ऊर्जा आधारित जल संयंत्रों को दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बेहद उपयोगी और टिकाऊ बताया। यह पहल न केवल जल संकट को दूर कर रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी अहम कदम साबित हो रही है।
प्रदेश में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में क्रेडा (CREDA) विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा आधारित जल योजनाओं को तेजी से लागू किया जा रहा है। क्रेडा चेयरमैन भूपेंद्र सवन्नी और सीईओ आईएएस राजेश सिंह राणा के मार्गदर्शन में बस्तर संभाग के सुदूर गांवों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है।
दौरे के दौरान सोन ने ग्राम पंचायत के सरपंच परसेक दुले से भी संवाद किया। उन्होंने गांव की जनसंख्या, जल टंकी के संचालन की स्थिति और पूर्व में पेयजल के अस्थायी स्रोतों के बारे में जानकारी ली। इससे यह स्पष्ट हुआ कि पहले जहां ग्रामीणों को पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, वहीं अब घर के पास ही स्वच्छ जल उपलब्ध हो रहा है।
सुकमा के बाद श्री सोन ने दंतेवाड़ा जिले के कटेकल्याण विकासखंड अंतर्गत ग्राम भूसारास का दौरा किया। यहां उन्होंने जल जीवन मिशन के तहत चल रहे विभिन्न कार्यों का निरीक्षण किया और सोलर आधारित जल योजनाओं का अवलोकन किया। उन्होंने घर-घर नल कनेक्शन (FHTC) की स्थिति का जायजा लिया और लाभार्थी महिलाओं से बातचीत कर योजनाओं के प्रभाव को समझा।

इस दौरान उन्होंने आंगनवाड़ी केंद्र में पानी की गुणवत्ता का परीक्षण भी किया और स्वयं नल से पानी पीकर उसकी गुणवत्ता का अनुभव लिया। उन्होंने जल अर्पण कार्यक्रम, पंचायत भवन के पास जल प्रदाय व्यवस्था और जल बहिनी द्वारा किए जा रहे जल परीक्षण कार्यों को भी देखा और उनकी सराहना की।

कुल मिलाकर यह दौरा न केवल सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि सही योजना, प्रभावी क्रियान्वयन और स्थानीय सहयोग से दूरस्थ क्षेत्रों में भी विकास की रोशनी पहुंचाई जा सकती है। जल जीवन मिशन के तहत सुकमा और दंतेवाड़ा जैसे क्षेत्रों में हो रहा यह कार्य देश के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बनता जा रहा है।

