मजिस्ट्रेट से धक्का-मुक्की पर बवाल: कांग्रेस नेता निखिल द्विवेदी पर एफआईआर की मांग, प्रशासनिक संघ ने दी आंदोलन की चेतावनी
छत्तीसगढ़ – राजनांदगांव जिले में कानून-व्यवस्था ड्यूटी के दौरान कार्यपालिक मजिस्ट्रेट के साथ कथित धक्का-मुक्की और अभद्र व्यवहार का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना को लेकर छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ, जिला इकाई राजनांदगांव ने कांग्रेस नेता निखिल द्विवेदी और उनके समर्थकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। संघ ने इस घटना को प्रशासनिक व्यवस्था और अधिकारियों की गरिमा पर सीधा हमला बताते हुए गहरी नाराजगी जताई है।
संघ द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 15 अप्रैल 2026 की रात राजनांदगांव-बालोद मार्ग पर स्थित सिंघोला क्षेत्र में एक सड़क दुर्घटना के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए थे। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन की ओर से नायब तहसीलदार राकेश नागवंशी को मौके पर भेजा गया था, जो अपनी टीम के साथ शांति व्यवस्था बनाए रखने में जुटे हुए थे। इसी दौरान कांग्रेस नेता निखिल द्विवेदी अपने समर्थकों के साथ घटनास्थल पर पहुंचे।

बताया गया कि मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों और कांग्रेस नेता के बीच किसी बात को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई। आरोप है कि बहस के दौरान निखिल द्विवेदी और उनके समर्थकों ने न केवल शासकीय कार्य में बाधा डाली, बल्कि कार्यपालिक मजिस्ट्रेट के साथ धक्का-मुक्की और अभद्र व्यवहार भी किया। संघ का कहना है कि यह घटना न केवल अनुशासनहीनता का उदाहरण है, बल्कि सरकारी ड्यूटी कर रहे अधिकारियों के प्रति असम्मानजनक रवैये को भी दर्शाती है।
संघ ने इस पूरे घटनाक्रम को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद इस तरह की घटना होना प्रशासनिक सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि यदि ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों के साथ इस प्रकार का व्यवहार होगा, तो भविष्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखना और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।
ज्ञापन में संघ ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि इस मामले में कांग्रेस नेता निखिल द्विवेदी और उनके साथ शामिल अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 186 (सरकारी कार्य में बाधा), 353 (लोक सेवक पर हमला या बल प्रयोग), 332 (लोक सेवक को चोट पहुंचाना), 504 (जानबूझकर अपमान) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए। साथ ही दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है।
इसके अलावा, संघ ने भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ड्यूटी पर तैनात प्रशासनिक अधिकारियों को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है। उन्होंने कहा कि संवेदनशील परिस्थितियों में कार्य कर रहे अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। साथ ही, ऐसी घटनाओं में जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही तय करने की भी मांग उठाई गई है।
संघ ने अपने ज्ञापन के माध्यम से चेतावनी भी दी है कि यदि इस मामले में शीघ्र और ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन अपने सम्मान और सुरक्षा की रक्षा के लिए आगे की रणनीति बनाने को बाध्य होगा। इसमें आंदोलन या अन्य लोकतांत्रिक उपाय भी शामिल हो सकते हैं।
इस घटना के सामने आने के बाद जिले में राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। जहां एक ओर प्रशासनिक संघ इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है, वहीं अब सभी की नजरें जिला प्रशासन और पुलिस की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। यह देखना अहम होगा कि इस संवेदनशील मामले में जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या दोषियों के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई होती है या नहीं।

