April 23, 2026

छत्तीसगढ़ में यूसीसी आदिवासियों के हितों, अधिकारों पर डाका डालने की कोशिश – दीपक बैज

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रायपुर – साय मंत्रिमंडल ने यूसीसी लागू करने के लिए एक कमेटी का गठन किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि अगर छत्तीसगढ़ में यूसीसी लागू होता तो सबसे बड़ा नुकसान छत्तीसगढ़ के आदिवासियों को होगा। यूसीसी छत्तीसगढ़ के आदिवासियां के खिलाफ है, राज्य में केवल आदिवासी ही ऐसे है जिन्हें प्रदेश में निवासरत अन्य लोगों की अपेक्षा विशेष संवैधानिक संरक्षण मिला हुआ है। इसके अलावा कोई भी वर्ग छत्तीसगढ़ में नहीं है जिसके लिए विशेष नागरिक प्रावधान लागू है। छत्तीसगढ़ में 32 प्रतिशत से अधिक आबादी आदिवासियों की है, संरक्षित जनजातियां है, जिन्हें संविधान में कुछ विशेष अधिकार मिले है। उनकी रक्षा के लिए पेसा कानून लागू है और 5 अनुसूची लागू है और भाजपा यूसीसी लाकर आदिवासियों के हितों में डकैती डालने की कोशिश में है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि जब से बस्तर में नक्सलवाद खत्म होने की घोषणा हुई है उसके बाद से ही भाजपा के समर्थित उद्योगपति बस्तर में आदिवासियों की जमीन पर नजरे गड़ाये हुए है। बस्तर में भाजपा के समर्थित उद्योगपतियों की नजर लग चुकी है और वह आदिवासियों की जमीन हड़पना चाहते है। यूसीसी लाने की कवायद इसीलिए है। राज्य के आदिवासियों के हितों को दरकिनार करके उद्योगपतियों के हितों को बढ़ावा देने की कोशिश है। आदिवासियों की जमीनें कानून दूसरा कोई ले नहीं सकता, इसलिए तमाम तरीके के रास्ते खोजने की शुरूआत की जा रही है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि प्रदेश का मुखिया एक आदिवासी है उसके बाद राज्य के बहुसंख्यक आदिवासियों के हितों के खिलाफ सरकार निर्णय ले रही है। मुख्यमंत्री और सरकार ये बताये कि-

ऽ क्या यूसीसी लागू होने के बाद प्रदेश में पेसा कानून का अस्तित्व यथावत रहेगा?

ऽ पांचवी अनुसूची की पंचायतों के अधिकारों में कोई छोड़छाड़ नहीं होगी?

ऽ राज्य की संरक्षित जनजातियां बैगा, कमार, पहाड़ी, कोरवा, बिरहोर, अबुझमाड़िया, भुंजिया, पांडा को संविधान में विशेष संरक्षण मिला है क्या यूसीसी लागू होने पर इनके अधिकार सुरक्षित रहेंगे?

ऽ आदिवासियों की जमीनों पर उनके सामुदायिक अधिकारों का हनन नहीं किया जायेगा?

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि भाजपा राज्य में यूसीसी लागू करके आदिवासियों के मौलिक अधिकारों का हनन करने का षड़यंत्र कर रही है। संविधान में आदिवासियों को विशेष संरक्षण प्राप्त है। उसमें किसी भी प्रकार की छोड़छाड़ बर्दास्त नहीं की जायेगी।

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