जमीन घोटाले का बड़ा खुलासा: सरकारी जमीन पर कब्जा कर अवैध प्लाटिंग, जांच रिपोर्ट में बसंत अग्रवाल घिरे
रायपुर – राजधानी के धरसींवा क्षेत्र से जमीन घोटाले का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां सरकारी जमीनों पर कथित रूप से कब्जा कर अवैध प्लाटिंग किए जाने की जांच रिपोर्ट ने प्रशासन और भू-माफियाओं के गठजोड़ पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस पूरे मामले में जमीन कारोबारी बसंत अग्रवाल का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है, जिन पर चारागाह, निस्तारीकरण और जल क्षेत्र की भूमि पर बेजा कब्जा कर प्लाटिंग करने के आरोप लगे हैं।
आरटीआई के माध्यम से सामने आई जांच रिपोर्ट के मुताबिक, धरसींवा अंतर्गत ग्राम गिरौद में कई खसरा नंबरों की सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट में खसरा नंबर 644 (0.0810 हे.), 636 (0.279 हे.), 634 (0.1460 हे.), 511/5 (6.3900 हे.), 638 (1.0190 हे.) सहित अन्य जमीनों पर अवैध कब्जा कर प्लाटिंग किए जाने का उल्लेख है। खास बात यह है कि इन जमीनों में चारागाह, निस्तारीकरण और जल स्रोत जैसी संवेदनशील श्रेणियों की भूमि शामिल है, जिनका उपयोग आम जनता और ग्रामीणों के हित के लिए होता है।
ग्रामीणों की लगातार शिकायतों के बाद प्रशासन हरकत में आया। किसानों ने आरोप लगाया कि बसंत अग्रवाल द्वारा सरकारी जमीनों पर कब्जा कर न सिर्फ अवैध प्लाटिंग की जा रही है, बल्कि वहां सड़क निर्माण कर भूखंड बेचे जा रहे हैं। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने जांच के आदेश दिए, जिसके बाद तहसील स्तर पर विस्तृत जांच की गई।

जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, खसरा नंबर 511/5 में दर्ज 6.39 हेक्टेयर शासकीय भूमि में से लगभग 4.51 हेक्टेयर क्षेत्र में मुरूम डालकर रास्ता बनाया गया है। इसी तरह खसरा नंबर 634 और अन्य जमीनों पर भी प्लाटिंग के लिए सड़कें तैयार की गईं। कई जगहों पर 60 फीट चौड़ी सड़क बनाकर उसके किनारे प्लॉट काटे गए हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि जल स्रोत और निस्तारीकरण की जमीनों को समतल कर कब्जा किया गया।
मामले में कुछ अन्य नाम भी सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पूनम चौधरी और उनके पति विनोद कुमार चौधरी द्वारा भी बाउंड्री वॉल बनाकर अतिक्रमण किया गया है। वहीं ओमप्रकाश सरवैया द्वारा भी अवैध प्लाटिंग किए जाने की बात सामने आई है। यह दर्शाता है कि यह कोई एकल मामला नहीं, बल्कि संगठित तरीके से चल रहा बड़ा खेल हो सकता है।
इस पूरे मामले में एसडीएम नंदकुमार चौबे ने सख्ती दिखाते हुए तहसीलदार को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित पक्षों को तीन बार नोटिस जारी किया जाएगा और उसके बाद नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि सवाल यह उठता है कि इतने बड़े स्तर पर सरकारी जमीन पर कब्जा कैसे होता रहा और प्रशासन को इसकी भनक क्यों नहीं लगी?
वहीं जब इस मामले में बसंत अग्रवाल से पक्ष जानने की कोशिश की गई तो उन्होंने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना है कि जांच रिपोर्ट पूरी तरह फर्जी और मनगढ़ंत है, जिसे उनकी छवि खराब करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने इस संबंध में एसडीएम से मुलाकात कर अपनी बात रखी है।
फिलहाल, यह मामला रायपुर में जमीन घोटालों की परतें खोलता नजर आ रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पर कितनी तेजी और पारदर्शिता से कार्रवाई करता है, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

