वीडियों :वन माफिया बेलगाम! झारखंड नंबर ट्रक से 8 लाख की अवैध लकड़ी जब्त, कार्रवाई रोकने ट्रक के नीचे लेट गए तस्कर
छत्तीसगढ़ – कोरिया जिले के सोनहत वन परिक्षेत्र में वन माफिया इतने बेखौफ हो चुके हैं कि अब वे सरकारी कार्रवाई को खुलेआम चुनौती देने लगे हैं। झारखंड नंबर के एक ट्रक से 7 से 8 लाख रुपये की अवैध लकड़ी जब्त की गई है, लेकिन इससे भी ज्यादा चौंकाने वाला खुलासा यह है कि तस्कर खुद मौके पर पहुंचकर कार्रवाई रुकवाने की कोशिश करते नजर आए।
बेलिया जंगल में नाकेबंदी, ट्रक पकड़ा – ड्राइवर फरार
गुप्त सूचना के आधार पर वन विभाग ने सोनहत के बेलिया जंगल में नाकेबंदी की। जांच के दौरान झारखंड पासिंग ट्रक को रोका गया, जिसमें भारी मात्रा में कीमती लकड़ी के बोटे (Logs) भरे हुए थे। जैसे ही वन अमले ने पूछताछ शुरू की, ड्राइवर ट्रक छोड़कर फरार हो गया, जो साफ तौर पर संगठित तस्करी की ओर इशारा करता है।
अवैध तस्करी रोकने पहुंचे अधिकारी, माफिया बन गए कानून
सूत्रों के मुताबिक, मौके पर अंकित पटेल (निवासी ग्राम तेलीमुड़ा, सोनहत) और विकेश जायसवाल पहुंचे और वन विभाग की कार्रवाई को रोकने का प्रयास करने लगे। हद तो तब हो गई जब ट्रक को जप्त कर डिपो ले जाते समय दोनों आरोपी ट्रक के नीचे लेट गए, ताकि वाहन को आगे न ले जाया जा सके।
मीडिया पहुंची तो भाग निकले आरोपी
आज जब मीडिया कर्मी लकड़ी डिपो में कवरेज के लिए पहुंचे, उस समय भी दोनों आरोपी मौके पर मौजूद थे। लेकिन जैसे ही कैमरा ऑन हुआ, तुरंत गाड़ी स्टार्ट की और मौके से फरार हो गए। क्या यह डर कानून का था या सिर्फ कैमरे का?
सिंगल परमिट की आड़ में बड़ा खेल
जांच में सामने आया कि प्राइवेट भूमि के नाम से सिंगल परमिट बनवाकर उसकी आड़ में अवैध लकड़ी का पूरा नेटवर्क चलाया जा रहा था। परमिट और टीपी जांच के बाद वन विभाग ने ट्रक और लकड़ी को जप्त कर डिपो में खड़ा करवा दिया है।
बड़ा सवाल: किसके संरक्षण में पल रहा वन माफिया?
जब तस्कर खुद जांच में रोड़ा बन रहे हैं, अधिकारियों को खुलेआम चुनौती दे रहे हैं, तो सवाल लाज़मी है— इन पर कौन-कौन सी धाराएं लगेंगी? या फिर यह पूरा खेल विभागीय सांठगांठ से चल रहा है? क्या सिर्फ ट्रक जब्त कर मामला रफा-दफा कर दिया जाएगा?
लोध छाल की तस्करी भी चरम पर
सोनहत जंगल से लेकर रामगढ़–छतरंग जंगल तक लोध छाल की तस्करी वर्षों से जोरों पर है। ग्रामीणों से औने-पौने दाम में लोध छाल खरीदी जाती है और सूरजपुर–अंबिकापुर में ₹80 से ₹100 प्रति किलो बेची जाती है। अगरबत्ती, साबुन और कई दैनिक उपयोगी उत्पादों में इस्तेमाल होने वाली यह छाल आज तस्करों के लिए सोने की खान बन चुकी है।
बयान
वन विभाग के अधिकारी ने बताया कि—“झारखंड पासिंग ट्रक क्रमांक JH02AF0673 को कल रात अवैध लकड़ी परिवहन के दौरान जब्त किया गया है। मामले में जांच जारी है और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।”

