वीडियो : फाइलों से निकलकर सड़क पर उतरे कलेक्टर गौरव सिंह, पिंक ई-रिक्शा में बैठकर परखी योजनाओं की असली सच्चाई
( रिपोर्ट – बिप्लव दत्ता ) रायपुर – जब ज़्यादातर निरीक्षण सिर्फ काग़ज़ों और फोटो सेशन तक सिमट जाते हैं, तब मंदिर हसौद निरीक्षण के दौरान कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने अचानक रुककर वह कर दिखाया, जिसकी उम्मीद जनता प्रशासन से करती है। कलेक्टर सीधे पिंक ई-रिक्शा में बैठे और महिला स्वावलंबन की सरकारी योजनाओं की मैदानी हकीकत खुद परखी।
ई-रिक्शा चालक सीतू कोसले, निवासी कोटरभाटा (आरंग), से कलेक्टर ने दो टूक सवाल किए— कमाई कितनी है? काम नियमित है या सिर्फ काग़ज़ों में? परिवार की हालत बदली या नहीं?
सीतू का जवाब
“ई-रिक्शा से 20 हजार रुपये से ज़्यादा महीने की आमदनी हो रही है। अब किसी पर निर्भर नहीं हूं। परिवार भी खुश है और मुझे सम्मान मिलता है।”
यह बयान उन अफसरों और विभागों के लिए आईना है, जो योजनाओं की सफलता सिर्फ रिपोर्टों में दिखाते हैं, ज़मीन पर नहीं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में चलाई जा रही पिंक ई-रिक्शा योजना केवल हरित परिवहन नहीं, बल्कि महिलाओं के हाथ में कमान देने की पहल है। कलेक्टर का यह कदम साफ संदेश देता है—अब काग़ज़ी कामयाबी नहीं, ज़मीनी नतीजे चाहिए।
प्रशासन अगर सच में गंभीर है, तो पिंक ई-रिक्शा जैसी योजनाओं की संख्या, निगरानी और पहुंच तीन गुना करनी होगी। वरना महिला सशक्तिकरण सिर्फ भाषणों और पोस्टरों तक ही सिमटकर रह जाएगा।

