EXCLUSIVE: कांग्रेस की चहेती अफ़सर DSP कल्पना वर्मा!फाइल नंबर 32/1/2026 ob numbar का राज़ क्या? मुख्यमंत्री सचिवालय में क्यों ‘होल्ड’ है कार्रवाई?
( रिपोर्ट – बिप्लव दत्ता ) रायपुर – छत्तीसगढ़ में कानून-व्यवस्था की हालत पर रोज़ नए सवाल खड़े हो रहे हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने संगीन आरोपों के बावजूद DSP कल्पना वर्मा पर कार्रवाई की फाइल आज तक आगे नहीं बढ़ पाई है। फाइल नंबर 32/1/2026—ob numbar कार्रवाई का रास्ता खोल सकती थी। आज भी मुख्यमंत्री सचिवालय में होल्ड पड़ी है। सवाल सीधा है—आख़िर क्यों?
सूत्रों के मुताबिक यह फाइल सचिवालय में लंबे समय से अटकी हुई है। आरोप गंभीर हैं, शिकायतें दर्ज हैं, लेकिन कार्रवाई शून्य। इससे यह सवाल उठना लाज़मी है कि क्या DSP कल्पना वर्मा को राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है।
राज्य के कद्दावर अधिकारी के पास दबी है ‘फाइल’
सत्ता, प्रशासन और पुलिस महकमे के भीतर इस वक्त एक फाइल सबसे ज़्यादा बेचैनी पैदा कर रही है— फाइल नंबर 32/1/2026 यह फाइल किसी छोटे बाबू या सामान्य अधिकारी के टेबल पर नहीं, बल्कि राज्य के एक बेहद कद्दावर अधिकारी के पास अटकी हुई है। जिसकी अनुमति के बिना फाइल आगे बढ़ ही नहीं सकती। यही वजह है कि इसे लेकर चर्चाएं अब सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि विस्फोटक सियासी मोड़ ले चुकी हैं।
दंतेवाड़ा से दिल्ली तक ‘तूती’ बोलने के आरोप
नाम न बताते जाने विश्वसनीय सूत्र की माने दंतेवाड़ा से लेकर दिल्ली तक DSP कल्पना वर्मा की मजबूत पकड़ है। कई वरिष्ठ IPS अधिकारियों से उनके नज़दीकी और घनिष्ठ संबंध बताए जाते हैं। जिससे दूसरे इस स्तर की अधिकारियों से मुलाकात तक नही कर पाते..और कल्पना कई घंटे तक मीटिंग करती थी। यही वजह मानी जा रही है कि सरकार और सिस्टम कार्रवाई करने से डरता हुआ नज़र आ रहा है।
फाइल खुलेगी तो हनी ट्रैप से बड़ा मामला आएगा”
अफसरशाही और राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा ज़ोर पकड़ रही है कि अगर फाइल 32/1/2026 पूरी तरह खोली गई, तो यह मामला सिर्फ प्रशासनिक अनियमितता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ‘हनी ट्रैप’ से भी बड़ा और खतरनाक नेटवर्क सामने आ सकता है। सूत्र यह तक कह रहे हैं कि पहले हनी ट्रैप के मामले सिविल लोगों तक सीमित माने जाते थे। लेकिन अब वर्दीधारी अधिकारियों द्वारा पैसे, दबाव और प्रभाव के लिए हनी ट्रैप जैसे हथकंडे अपनाने की आशंका जताई जा रही है। यह आरोप नहीं, बल्कि फाइल से जुड़े बिंदुओं को लेकर उठ रहे गंभीर सवाल हैं।
क्या कानून सबके लिए बराबर नहीं?
प्रदेश में लगातार कानून-व्यवस्था की विफलता सामने आ रही है।चाहे,अम्बिकापुर कांड,बलौदाबाजार कांड,रायगढ़ कांड,कांकेर कांड,
राजधानी रायपुर का मैग्नेटो मॉल कांड,कवर्धा कांड हो ऐसे कई एक के बाद एक घटनाएं यह साबित कर रही हैं कि प्रदेश में कानून व्यवस्था चरमरा चुकी है। इसके बावजूद सवाल यह है कि ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती हैं।
सिर्फ़ आम जनता पर ही सख़्ती क्यों?
जब कोई आम नागरिक गलती करता है, तो उस पर तुरंत कार्रवाई होती है। लेकिन जब वर्दी में बैठे अफसरों पर गंभीर आरोप लगते हैं, तो फाइलें दबा दी जाती हैं..जांच लटकाई जाती है….और सत्ता मौन साध लेती है
फाइल नंबर 32/1/2026 को आखिर किसके आदेश पर होल्ड किया गया…क्या DSP कल्पना वर्मा कानून से ऊपर हैं….या अफसरशाही दबाव के चलते कार्रवाई रोकी गई है…अगर सरकार सच में सुशासन और कानून-व्यवस्था की बात करती है, तो उसे यह साफ़ करना होगा कि DSP कल्पना वर्मा पर कार्रवाई कब होगी…या फिर यह मान लिया जाए कि छत्तीसगढ़ में कानून सबके लिए बराबर नहीं है.

