गांधी को भूला ‘सुशासन’! पुण्यतिथि पर खुली शराब दुकानें, सरकार मौन—RTI एक्टिविस्ट का करारा गांधीवादी तमाचा
( रिपोर्ट – बिप्लव दत्ता ) रायपुर – जिस छत्तीसगढ़ को सुशासन का मॉडल बताकर ढोल पीटे जाते हैं, उसी प्रदेश में 25 साल के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ, जिसने सरकार की संवेदनशीलता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। महात्मा गांधी की पुण्यतिथि 30 जनवरी—जिस दिन पूरा देश शहीद-ए-आजम को नमन करता है—उस दिन राजधानी रायपुर समेत प्रदेश में शराब दुकानें और दारू भट्टियाँ धड़ल्ले से खुली रहीं। यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि गांधी के विचारों और बलिदान का अपमान माना जा रहा है।
सरकार की इस ‘शराब-नीति’ पर सबसे तीखा लेकिन शांत विरोध दर्ज कराया RTI एक्टिविस्ट कुणाल शुक्ला ने। वे नारे लगाने नहीं, बल्कि गांधीवादी तरीके से गुलाब का फूल लेकर शराब दुकान पहुँचे और मैनेजर व कर्मचारियों का स्वागत, वंदन और अभिनंदन कर दिया।
यह दृश्य जितना शांत था, संदेश उतना ही तीखा—
👉 जहाँ सरकार को शर्म आनी चाहिए थी, वहाँ गुलाब बोल रहा था।
सवाल उठना लाज़मी है— क्या सरकार के लिए राजस्व, राष्ट्रपिता से बड़ा हो गया है? क्या सुशासन अब सिर्फ भाषणों और पोस्टरों तक सीमित रह गया है? और क्या गांधी के आदर्श अब शराब की बोतलों के शोर में दबा दिए गए हैं? आज गुलाब दिया गया है… कल जनता सवालों का बवंडर भी खड़ा कर सकती है।

