छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग के एम्पेनलमेंट पर उठे गंभीर सवाल
(रिपोर्ट – बिप्लव दत्ता ) रायपुर – छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग के मीडिया एम्पेनलमेंट सिस्टम को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। विभाग की एम्पेनलमेंट सूची में शामिल कई न्यूज़ पोर्टल के अस्तित्व पर ही सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि कुछ ऐसे पोर्टल सूची में शामिल हैं जिनकी न तो सक्रिय वेबसाइट है और न ही कोई वास्तविक संचालन, इसके बावजूद उन्हें सरकारी विज्ञापन भुगतान किया जा रहा है।

डोमेन GoDaddy वेबसाइट पर बिक्री
ऐसा ही एक मामला www.aapkanews.com नामक न्यूज़ पोर्टल को लेकर सामने आया है। आरोप है कि यह पोर्टल जनसंपर्क विभाग की एम्पेनलमेंट सूची में दर्ज है, जबकि संबंधित डोमेन GoDaddy वेबसाइट पर बिक्री के लिए सूचीबद्ध बताया जा रहा है, जिससे इसके सक्रिय होने पर सवाल खड़े होते हैं।
एम्पेनलमेंट सूची में शामिल
सूत्रों के अनुसार, यदि कोई न्यूज़ पोर्टल वास्तव में संचालित ही नहीं हो रहा है, तो उसे एम्पेनलमेंट सूची में शामिल करना और उसके नाम पर भुगतान किया जाना नियमों के विपरीत है। इस पूरे मामले में जनसंपर्क विभाग की कार्यप्रणाली और आंतरिक जांच प्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
पारदर्शी प्रक्रिया के अभाव
वहीं दूसरी ओर, प्रदेश के कई छोटे और स्थानीय छत्तीसगढ़ी पत्रकारों का आरोप है कि वे सीमित संसाधनों में अपने न्यूज़ पोर्टल संचालित कर रहे हैं, लेकिन पारदर्शी प्रक्रिया के अभाव और कथित कमीशन सिस्टम के कारण उनके पोर्टल को एम्पेनलमेंट सूची में जगह नहीं मिल पा रही है।
इस पूरे मामले में जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल पूछे जा रहे हैं। हालांकि, अभी तक विभाग की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
नियमों की अनदेखी
पत्रकार संगठनों और मीडिया से जुड़े लोगों ने इस मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि एम्पेनलमेंट प्रक्रिया में कहीं नियमों की अनदेखी या वित्तीय अनियमितता तो नहीं हो रही।

यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला न केवल सरकारी धन के दुरुपयोग का होगा, बल्कि ईमानदार पत्रकारों के साथ अन्याय का भी गंभीर उदाहरण माना जाएगा।

