March 8, 2026

झीरम घाटी वृहद हत्याकांड; पूर्व वरिष्ठ प्रवक्ता विकास तिवारी ने उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा से मुलाकात का मांगा समय

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रायपुर – छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी के पूर्व वरिष्ठ प्रवक्ता विकास तिवारी ने झीरम घाटी वृहद हत्याकांड को लेकर एक बार फिर बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा से अति-आवश्यक मुलाकात का समय मांगा है। तिवारी का कहना है कि उन्हें “झीरम घाटी वृहद नरसंहार जाँच आयोग” से जुड़े दिल्ली से प्राप्त जवाब, महत्वपूर्ण दस्तावेज और साक्ष्य मिले हैं, जिन पर व्यक्तिगत रूप से विधि-सम्मत चर्चा कर आगे की कार्यवाही की रूपरेखा तय करना आवश्यक है। विकास तिवारी ने अपने पत्र में 23 मई 2013 को सुकमा जिले के दरभा/झीरम घाटी में कांग्रेस की “परिवर्तन यात्रा” पर हुए नक्सली हमले की याद दिलाते हुए कहा कि यह हमला घात लगाकर और सुनियोजित साजिश के तहत किया गया था। इस वीभत्स हमले में देश-प्रदेश के कई बड़े नेता, पुलिसकर्मी और आम नागरिक शहीद हुए थे, जिनमें प्रमुख रूप से—पं. विद्याचरण शुक्ल (पूर्व केंद्रीय मंत्री) नंदकुमार पटेल (पूर्व गृह मंत्री, तत्कालीन PCC अध्यक्ष) महेंद्र कर्मा (पूर्व नेता प्रतिपक्ष, ‘बस्तर टाइगर’) उदय मुदलियार (पूर्व विधायक) योगेंद्र शर्मा (वरिष्ठ कांग्रेस नेता) शामिल थे।

तिवारी ने बताया कि घटना के बाद तत्कालीन सरकार ने झीरम घाटी वृहद नरसंहार जाँच आयोग का गठन किया था, जिसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति सतीश कुमार अग्निहोत्री (पूर्व मुख्य न्यायाधीश, मणिपुर हाईकोर्ट) और सदस्य न्यायमूर्ति गरीब मिंहाजुद्दीन (पूर्व न्यायाधीश, बिलासपुर हाईकोर्ट) कर रहे थे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 29 दिसंबर 2025 को दोपहर 3:08 बजे उन्होंने भारतीय डाक के माध्यम से आयोग को आवेदन व साक्ष्य प्रेषित किए थे। पत्र में तिवारी ने राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार करते हुए कहा कि यह विषय दलगत राजनीति से ऊपर है और न्याय व सत्य के लिए जरूरी है कि उपमुख्यमंत्री/गृहमंत्री उनसे मिलकर दस्तावेजों का सत्यापन करें और कानूनी पहलुओं पर ठोस निर्णय लिया जाए। उन्होंने आग्रह किया कि उन्हें मोबाइल या ई-मेल के माध्यम से शीघ्र समय सूचित किया जाए।झीरम घाटी नरसंहार पर नए साक्ष्यों की चर्चा ने एक बार फिर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि उपमुख्यमंत्री/गृहमंत्री इस मुलाकात को कितनी जल्द मंजूरी देते हैं और न्याय की दिशा में अगला कदम क्या होता है।

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