March 6, 2026

हाथकरघा संघ में करोड़ों रुपये की अनियमितता का बड़ा आरोप, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और विभागीय मंत्री गजेन्द्र यादव से प्रबंध संचालक श्याम धवाड़े व सचिव एम एम जोशी को तत्काल हटाने की मांग

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( रिपोर्ट – बिप्लव दत्ता ) रायपुर – छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा विकास एवं विपणन सहकारी संघ मर्यादित, रायपुर में वर्षों से चल रहे कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं का बड़ा भ्रष्टाचार किए जाने का मामला सामने आया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और विभागीय मंत्री गजेन्द्र यादव को भेजी गई शिकायत में संघ के प्रबंध संचालक श्याम धावड़े और सचिव एम.एम. जोशी पर निजी फर्मों और कुछ कर्मचारियों को संरक्षण देकर शासन को करोड़ों रुपये की क्षति पहुंचाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

रिजेक्ट कपड़ा घोटाला: लाखों का भुगतान

शिकायत के अनुसार, हैदराबाद की मारुति कोटेक्स लिमिटेड द्वारा हाथकरघा संघ के लिए कपड़ा डाइंग, प्रोसेसिंग और प्रिंटिंग का कार्य किया जाता है। आरोप है कि फर्म ने 60,236 मीटर बाहरी/रिजेक्टेड कपड़ा संघ के गोदाम में जमा कराया, लेकिन इसके बावजूद संघ द्वारा ₹62.45 लाख तथा ₹9.08 लाख प्रिंटिंग चार्ज का भुगतान कर दिया गया। यह भुगतान जानबूझकर किया गया बताया जा रहा है, जिससे शासन को भारी आर्थिक क्षति हुई। अब भी उक्त राशि की वसूली नहीं की गई है।

शिकायतकर्ता अधिकारी को ही बनाया गया निशाना

गोदाम के तत्कालीन प्रभारी रामकिशुन देवांगन ने 10 अक्टूबर 2025 को गलत कपड़ा जमा होने की जानकारी प्रबंध संचालक श्याम धावड़े को दी, लेकिन दोषी फर्म पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें ही पद से हटा दिया गया। इसके बाद 3 नवंबर 2025 को संचालनालय में मुख्य लेखा अधिकारी को शिकायत करने पर भी उनके ही खिलाफ ट्रांसफर की कार्रवाई की गई।

बाद में विभागीय जांच टीम गठित की गई, जिसमें यह पुष्टि हुई कि बाहरी कपड़ा वास्तव में संघ के गोदाम में जमा किया गया था।

महिला स्व-सहायता समूहों को ₹1.92 करोड़ की क्षति

एक अन्य गंभीर आरोप में कहा गया है कि तत्कालीन गोदाम प्रभारी यशवंत देवांगन द्वारा 1.28 लाख नग स्कूली ड्रेस महिला स्व-सहायता समूहों से बिना कार्य आदेश एडवांस में जमा कराए गए। आज तक समूहों को कार्य आदेश जारी नहीं हुआ, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को लगभग ₹1.92 करोड़ की क्षति हुई।

स्कूली गणवेश आपूर्ति में बड़ा खेल

शैक्षणिक सत्र 2025–26 में मुख्यमंत्री की सहमति के अनुसार संघ को 28 लाख पुराने गणवेश सेट तथा 29 लाख नए रंग के गणवेश सेट स्कूलों में आपूर्ति करने थे। कुल 57 लाख सेट प्रस्तावित थे। आरोप है कि पुराने गणवेश के निर्धारित 28 लाख सेट के स्थान पर 31 लाख सेट आपूर्ति कर दिए गए, यानी स्टॉक से 3 लाख सेट अधिक। यह अतिरिक्त आपूर्ति महिला स्व-सहायता समूहों से सांठगांठ कर कराई गई। इस पर मुख्य लेखा अधिकारी ने भुगतान को लेकर गंभीर आपत्ति दर्ज की है।

₹7.37 लाख का अतिरिक्त अवैध भुगतान

उत्पादन कक्ष प्रभारी गोविंद देवांगन पर आरोप है कि उन्होंने लेखा अधिकारी को बिना बताए हैदराबाद की एक कपड़ा प्रोसेसिंग/डाइंग फर्म को ₹7,37,091 का अतिरिक्त भुगतान करने की अनुशंसा कर दिए है । इस संबंध में नोटिस जारी किया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

संरक्षण और मिलीभगत के आरोप

शिकायत में कहा गया है कि संघ के शीर्ष अधिकारी भ्रष्ट कर्मचारियों और निजी फर्मों को संरक्षण दे रहे हैं। इससे यह आशंका भी जताई जा रही है कि इन कार्यों के पीछे निजी आर्थिक लाभ की मंशा हो सकती है।

60 हजार बुनकरों के भविष्य पर संकट

इन कथित घोटालों का सीधा असर 375 बुनकर समितियों से जुड़े लगभग 60 हजार बुनकरों पर पड़ रहा है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो हजारों बुनकर परिवारों को पलायन के लिए मजबूर होना पड़ेगा। अब पूरे प्रदेश की नजर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और विभागीय मंत्री गजेन्द्र यादव कार्यालय की कार्रवाई पर नज़र टिकी हुई है कि इस बहुचर्चित मामले में दोषियों पर कब और कैसी कार्रवाई होती है।

वर्जन :-

वही इस पूरे मामले पर विभाग के सचिव एम. एम जोशी से हमारे संवाददाता ने इस प्रकरण पर बात की तो उनका कहना है कि कुछ लोग विभाग और अधिकारियों को बदनाम करने में लगे है। कौन शिकायत किया मुझे इस बारे को कोई जानकारी नही है । आप आफिस आइए फिर आपको जानकारी दे दी जाएगी।

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