March 6, 2026

बड़ी खबर : निसदा में फर्शी पत्थर माफिया चंद्राकर और साहू बेलगाम, तय सीमा से ज्यादा खनन से सरकार को लाखों का नुकसान

0
1001717073

( रिपोर्ट – बिप्लव दत्ता ) रायपुर – आरंग विकासखंड के ग्राम निसदा में स्थित फर्शी पत्थर खदानों में नियमों को ताक पर रखकर बड़े पैमाने पर खनन किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि खदान संचालकों द्वारा तय सीमा से कहीं अधिक फर्शी पत्थरों का उत्खनन किया गया, जिससे शासन को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। इस अवैध खनन के पीछे पत्थर माफिया वीरेंद्र चंद्राकर और देवानंद साहू के नाम सामने आ रहे हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार, खदानों में न केवल अवैध रूप से पत्थरों की खुदाई की जा रही है, बल्कि नियमों के विपरीत मशीनों से कटाई भी कराई जा रही है। इससे पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुंच रही है, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठे हैं।

विरोध करने पर ग्रामीणों पर ही कार्रवाई

ग्रामीणों का आरोप है कि जब भी गांव के लोगों ने अवैध खनन का विरोध किया, तो उल्टा उनके खिलाफ ही थाने में शिकायत दर्ज करा दी गई। इससे माफियाओं का मनोबल इतना बढ़ गया है कि वे बेखौफ होकर खनन कार्य जारी रखे हुए हैं। ग्रामीणों के बीच यह सवाल गहराता जा रहा है कि इन माफियाओं को आखिर किसका संरक्षण प्राप्त है—नेताओं का या बड़े अधिकारियों का?

सीएम से पीएमओ तक की गई शिकायत

ग्रामीणों ने अवैध खनन को रोकने के लिए खनिज विभाग, राजस्व विभाग, जिला प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री, राज्यपाल और पीएमओ कार्यालय तक शिकायतें भेजी हैं। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है। ग्रामीणों का कहना है कि केवल औपचारिकता निभाने के लिए कलेक्टर द्वारा जांच टीम भेज दी जाती है, लेकिन जमीन पर स्थिति जस की तस बनी रहती है।

कोर्ट के आदेश की भी अनदेखी

मामले को लेकर यह भी सामने आया है कि न्यायालय के आदेशानुसार एक माह के भीतर जांच कर निर्णय लिया जाना था, लेकिन कई महीने बीत जाने के बावजूद जांच पूरी नहीं हुई।

खनिज अधिकारी का बयान

इस संबंध में खनिज विभाग के उपसंचालक राजेश मालवे का कहना है कि वे हाल ही में पदस्थ हुए हैं।“आपके द्वारा दी गई जानकारी हमारे संज्ञान में आई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर उचित कार्रवाई की जाएगी।”

हालांकि, अधिकारी के इस बयान से ग्रामीण संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि जब तक मौके पर अवैध खनन पूरी तरह बंद नहीं होता, तब तक सिर्फ बयान और नोटिस से कोई समाधान नहीं निकलेगा।

अब बड़ा सवाल

क्या अवैध खनन में संलिप्त लोगों पर वास्तव में कार्रवाई होगी?

या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

निसदा गांव के लोग अब जवाब और न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed