March 7, 2026

नई आबकारी नीति बनाने महिलाओं से सुझाव क्यों नहीं मांगे? सरकार की मंशा शराब की नदियां बहाने की – प्रवक्ता धनंजय ठाकुर

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रायपुर – नई आबकारी नीति बनाने महिलाओं से सुझाव नहीं लेने पर सवाल उठाते हुए प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि भाजपा सरकार 2025-26 नई आबकारी नीति बनाने शराब का विरोध कर रहे महिलाओं से सुझाव क्यों नहीं मांगा गया? विपक्ष में रहते भाजपा जिन महिलाओं से सिर में गंगाजल कलश रखवाकर शराबबंदी की मांग के लिए प्रदेश में रैली कर रही थी। महिलाओं से सरकार बनने पर शराब बंद करने का वादा कर रही थी। अब उन्हीं महिलाओं से सुझाव लेने में परहेज क्यों है? प्रदेश में महिलाएं शराब दुकान एवं अवैध शराब को बंद कराने की मांग को लेकर आंदोलन कर रही हैं, चक्का जाम कर रही हैं। शराब के कारण घर परिवार बर्बाद हो रहा है, उसे बचाने महिलाये संघर्ष कर रही है। गांवों में महिलायें रात में लाठियां लेकर शराबियों को खदेड़ रही है। ऐसे में सरकार को आबकारी नीति बनाने महिलाओं से सुझाव लेना था। लेकिन चंद अधिकारियों ने शराब कारोबारी को बुलाकर सुझाव मांगी। शराब बेचने और पिलाने वालों के हिसाब से नीतियां बनाई जा रही है। इससे स्पष्ट है कि भाजपा प्रदेश में शराब की नदियां बहाना चाहती है।

प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि भाजपा की सरकार बनने के बाद प्रदेश में 67 नई शराब दुकान खोली गई। होटल ढाबा में शराब पिलाने के लाइसेंस दिया जा रहा है, चौक चौराहा में बियर पिलाने के लिए अनुमति प्रदान की जा रही है, नकली शराब, बिना होलोग्राम के शराब एवं अवैध शराब की बिक्री जोरों पर है। गांव-गांव में बिक रहे अवैध शराब के कारण हिंसक संघर्ष की स्थिति है। ऐसे में सरकार को नई आबकारी नीति में शराब बंदी की घोषणा करना चाहिए। लेकिन भाजपा सरकार की मंशा प्रदेश के लोगों को ज्यादा से ज्यादा सुलभ तरीके से शराब उपलब्ध कराना है। भाजपा सरकार बनने के बाद प्रदेश में शराब की खपत बढ़ गई है, स्वास्थ्य सर्वे के अनुसार 55 प्रतिशत से अधिक पुरुष एवं लगभग 4.9 प्रतिशत महिलाएं शराब सेवन कर रही है, यह बेहद चिंता का विषय है। प्रदेश में प्रति व्यक्ति शराब की खपत 3,700 है, प्रति व्यक्ति 8 लीटर से अधिक शराब की खपत है, आखिर भाजपा शराब के काली कमाई की मोह में प्रदेश के भविष्य को खराब कर रही है। कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि नई आबकारी नीति शराब कारोबारी के अनुसार नहीं बल्कि शराब विरोधियों के अनुसार बनाया जाए। प्रदेश में शराबबंदी लागू किया जाए।

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