छत्तीसगढ़ में विभागों में भ्रष्टाचार का खेल!मंत्रियों ने कमाई की सारी हदें पार कीं — प्रमोशन का रेट 50 लाख तक पहुंचा
रिपोर्ट – बिप्लव दत्ता रायपुर– छत्तीसगढ़ में सत्ता और प्रशासन की साख पर सवाल खड़े करने वाली खबर सामने आई है। प्रदेश के कई प्रमुख विभागों — लोक निर्माण विभाग (PWD), स्वास्थ्य विभाग, आबकारी विभाग, राजस्व विभाग और वन विभाग (Forest Department) — में भ्रष्टाचार और घूसखोरी का खेल चरम पर बताया जा रहा है। सूत्रों का दावा है कि मंत्रियों और ऊंचे अधिकारियों की मिलीभगत से “पैसा दो और प्रमोशन पाओ” का सिस्टम खुलेआम चल रहा है।
प्रमोशन के लिए तय रेट — 30 लाख से 50 लाख तक
मिली जानकारी के अनुसार, छोटे जिलों में प्रमोशन का रेट 30 लाख रुपये, जबकि बड़े जिलों जैसे रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, बस्तर, अम्बिकापुर और रायगढ़ में यह रेट 50 लाख रुपये तक पहुंच गया है। बताया जा रहा है कि अधिकारी पदोन्नति पाने के लिए मंत्रीगण या उनके करीबी लोगों से सीधे संपर्क कर रहे हैं और तय रकम के बाद तुरंत आदेश जारी कर दिए जा रहे हैं।
“पैसा फेंको, तमाशा देखो” — सीनियर-जूनियर का नहीं रहा फर्क
राज्य के कई विभागों में अब वरिष्ठता, अनुभव और कार्यकुशलता का कोई महत्व नहीं रह गया है। जो ज्यादा पैसा दे रहा है, उसी को प्रमोशन या मनचाही पोस्टिंग मिल रही है। सूत्रों के अनुसार, यह खेल अब इतना संगठित हो गया है कि मंत्री के बंगले से संबंधित अधिकारियों को फोन तक किए जा रहे हैं।
अधिकारियों की मानें — “खेल जोरों पर चल रहा है”
कई वरिष्ठ अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह घूसखोरी अब सिस्टम का हिस्सा बन चुकी है। “ऊपर से आदेश आता है कि फलां अधिकारी को प्रमोशन देना है, और कुछ दिन बाद आदेश जारी हो जाता है,” अधिकारी ने कहा।
ईडी की सख्ती का डर नहीं, प्रदेश की छवि पर बुरा असर
राज्य में पहले से चल रही ईडी (ED) की कार्रवाई और कई विभागों में हुए भ्रष्टाचार के खुलासों के बावजूद यह खेल जारी है। सूत्रों के अनुसार, “अब मंत्रियों में ईडी का डर नहीं रह गया है, क्योंकि हर स्तर पर ‘सेटिंग’ और ‘डीलिंग’ का सिस्टम बन चुका है।”
जनता में गुस्सा, अफसरशाही में निराशा
प्रदेशभर में इस तरह के आरोपों ने आम जनता और ईमानदार अफसरों में आक्रोश फैला दिया है। कई कर्मचारी संगठन अब इस पूरे मामले की जांच की मांग कर रहे हैं।
अगर यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक ईमानदारी पर एक गहरा सवाल खड़ा करेगा।

