छत्तीसगढ़ में राजनीतिक – माफिया ठेकेदार गठजोड़ की चर्चा: भाजपा के विधायकों को दे रहे लग्जरी गाड़ियां उपहार
रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों एक बड़ा आरोप चर्चा का विषय बना हुआ है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद कुछ ठेकेदार, जो पहले कांग्रेस सरकार के करीबी थे, अब भाजपा के विधायकों को लग्जरी गाड़ियां उपहार में दे रहे हैं। यह आरोप लगाया जा रहा है कि इन उपहारों का मकसद विधायकों का “आशीर्वाद” पाना है ताकि उनका “काला साम्राज्य” बिना किसी रोक-टोक के फल-फूल सके।
यह मामला तब और गंभीर हो जाता है जब भाजपा के ही कुछ नेताओं ने नाम न छापने की शर्त पर यह खुलासा किया है कि रायपुर में ऐसे कई विधायक हैं, जिनका पूरा खर्चा माफिया ठेकेदार उठा रहे हैं। इन नेताओं का कहना है कि जो विधायक पहले इनोवा जैसी गाड़ियों में घूमते थे, अब वे फॉर्च्यूनर और एमजी हेक्टर जैसी महंगी गाड़ियों में घूम रहे हैं। यह स्थिति भाजपा के उन कट्टर कार्यकर्ताओं और नेताओं को नागवार गुजर रही है, जो सरकार में बदलाव को माफिया राज खत्म होने की उम्मीद से देख रहे थे।
माफियाओं का “बोलाबाला” – हर सरकार में जारी?
इस कहानी का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह ठेकेदार कथित तौर पर किसी भी पार्टी की सरकार हो, उस क्षेत्र के विधायकों को अपने पक्ष में करने में माहिर हैं। पिछले कांग्रेस सरकार में भी इन्हीं ठेकेदारों का “बोलबाला” था और अब भाजपा सरकार आने के बाद वे फिर से “मलाई” खा रहे हैं। इस बात से जहां एक तरफ भाजपा के नेताओं में आक्रोश है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के पूर्व विधायक भी नाराजगी जता रहे हैं, क्योंकि पांच साल तक उन्हें खुश रखने वाले ठेकेदार अब पाला बदलकर भाजपा विधायकों को खुश कर रहे हैं।
कमीशनखोरी को बढ़ावा
इस सांठगांठ के कारण कमीशनखोरी को भी बढ़ावा मिल रहा है। विधायक भूमि पूजन कहीं और कर देते हैं और रोड कहीं और बना देते हैं। इससे आम जनता को कोई फायदा नहीं हो रहा है।
भूमाफिया का दावा: सनातन का बड़ा प्रचारक
एक चौंकाने वाले मामले में, एक भूमाफिया ने अपने आप को सनातन का बड़ा प्रचारक बताया है। उन्होंने दावा किया है कि नेता और मंत्री उनके सामने कुछ नहीं हैं। हालांकि, उनके कार्यों से पता चलता है कि वे वास्तव में एक भूमाफिया हैं जो अवैध गतिविधियों में शामिल हैं।
दावा और वास्तविकता में अंतर
भूमाफिया का दावा और वास्तविकता में बड़ा अंतर है। एक ओर वे सनातन का प्रचारक होने का दावा करते हैं, वहीं दूसरी ओर वे अवैध गतिविधियों में शामिल हैं जो समाज के लिए हानिकारक हैं।
विभिन्न माफियाओं की चर्चा:
यह कहानी केवल राजनीतिक गठजोड़ तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें छत्तीसगढ़ में सक्रिय विभिन्न माफियाओं – जमीन माफिया, मुरम माफिया और रेत माफिया – का भी जिक्र है। ये सभी माफिया प्रदेश में हमेशा से ही चर्चा का विषय रहे हैं। पिछले कुछ समय में छत्तीसगढ़ में रेत माफिया की बर्बरता की कई खबरें सामने आई हैं, जिनमें पुलिसकर्मी और पत्रकारों पर हमले की घटनाएं भी शामिल हैं।
निष्कर्ष:
यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ में ठेकेदारों और राजनेताओं के बीच एक गहरे और पेचीदा गठजोड़ की तरफ इशारा करता है। यह देखना बाकी है कि इस पर राजनीतिक प्रतिक्रिया क्या होती है और क्या सरकार इन आरोपों की जांच के लिए कोई कदम उठाती है। फिलहाल, यह स्टोरी छत्तीसगढ़ की राजनीतिक गलियारों में एक बड़ा मुद्दा बन गई है और आगे भी इसके गरमाने की पूरी संभावना है।

