March 6, 2026

सडकों पर गणेश पंडाल लगाने की कोई लिखित अनुमति नहीं की जारी, परन्तु प्रशासन ने जारी की अघोषित अनुमति : डॉ.राकेश गुप्ता

0
Screenshot_20250821_224700_copy_800x629

रायपुर – छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में सडकों पर बिना अनुमति पंडाल और स्वागत द्वार लगाने को लेकर लंबित जनहित याचिका (46/2025) की सुनवाई के दौरान 21 जुलाई 2025 को महाअधिवक्ता छत्तीसगढ़ द्वारा उच्च न्यायालय को बताया गया कि कई विभाग मिल कर इस मामले में नई पालिसी बना रहे है, जिसमें कुछ समय लगेगा। उन्होंने कोर्ट को आश्वासन दिया कि जब तक नई पालिसी नहीं बन जाती तब तक त्योहारी सीजन इत्यादि में सडकों पर पंडाल लगाने के संबंध में वर्तमान में लागू गाइडलाइंस का पालन किया जाएगा। कोर्ट ने कहा था कि त्योहारी सीजन के मद्दे नजर, कोर्ट आशा रखता है कि जल्द ही नई पालिसी लाई जायेगी और इसी लिए 2 सितम्बर को जनहित याचिका की अगली सुनवाई रखी गई है। गौरतलब है कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ शासन गृह (पुलिस) विभाग मंत्रालय रायपुर के आदेश दिनांक 22 अप्रैल 2022 के अनुसार विविध धार्मिक कार्यक्रमों, सार्वजनिक कार्यक्रमों, आयोजनों की पूर्व अनुमति कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक से लेना अनिवार्य है जिसके तहत सडकों पर पंडाल लगाने की अनुमति लेना भी अनिवार्य है

क्या है अघोषित अनुमति?

डॉ गुप्ता ने बताया सड़कों पर गणेश पंडाल लगाने की एक भी लिखित अनुमति न तो कलेक्टर ने जारी की है ना ही पुलिस अधीक्षक ने। उसके बावजूद भी पूरे शहर में चौक-चौराहा पर, संकरी सडकों पर, जहां सामान्य दिनों में भी यातायात की समस्या बनी रहती है गणेश पंडाल लगना चालू हो गया है और प्रशासन आंख बंद करके बैठा हुआ है। स्टेशन रोड, शंकर नगर मेन चौक जैसे अति व्यस्त इलाकों में सड़क घेर कर पंडाल लगना चालू हो गया है। डॉक्टर गुप्ता ने इसका सीधा आरोप प्रशासन पर लगाते हुए कहा कि प्रशासन ने एक तरफ तो अपनी आंख बंद कर ली है और दूसरी तरफ सड़कों पर पंडाल लगाकर जनता का जीवन दूभर करने की अघोषित अनुमति दे दी है, जिसके तहत सडकों पर जगह जगह गणेश पंडाल लग रहे हैं। डॉक्टर गुप्ता ने बताया कि 19 अगस्त को एक बैठक हुई थी जिसमें अनुमति की तो कोई चर्चा नहीं हुई परंतु यह कहकर अघोषित अनुमति दी गई की पंडाल में सीसीटीवी कैमरा लगाना अनिवार्य रहेगा, जो स्पष्ट करता है कि प्रशासन के संरक्षण तले बिना अनुमति पंडाल लग रहे हैं। आने वाला त्योहारी समय शहर की जनता को ट्रैफिक जाम में फंसकर निकालना पड़ेगा। डॉ. गुप्ता ने कहा कि ऐसा लगता है कि जिला प्रशासन को अब कोर्ट का कोई डर नहीं रह गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed