March 6, 2026

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस मीडिया प्रभारी बनाम पत्रकार विवाद ने पकड़ा तूल, राधिका खेड़ा ने लगाए गंभीर आरोप

0
IMG-20250727-WA0002(1)

रायपुर – छत्तीसगढ़ में कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला और पत्रकार बिप्लव दत्ता के बीच हुए विवाद ने अब तूल पकड़ लिया है। बिप्लव दत्ता द्वारा संचार विभाग में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रकाशित एक खबर के बाद सुशील आनंद शुक्ला ने उन्हें कानूनी नोटिस भेजा। इस नोटिस के बाद प्रदेशभर के पत्रकारों में आक्रोश की लहर दौड़ गई है।

पत्रकारों का कहना है कि यदि निष्पक्ष खबरों पर राजनीतिक दबाव और कोर्ट नोटिस जैसी कार्रवाइयां की जाती हैं, तो भविष्य में मीडिया की स्वतंत्रता गंभीर संकट में पड़ सकती है।

राधिका खेड़ा ने किया खुला हमला

इसी बीच, कांग्रेस की पूर्व नेत्री और अब भाजपा में शामिल हो चुकीं राधिका खेड़ा ने सुशील आनंद शुक्ला पर तीखा हमला बोलते हुए सोशल मीडिया के ज़रिए कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि भूपेश बघेल के नेतृत्व में जनसंपर्क विभाग में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ियां की गईं और सुशील आनंद शुक्ला ने अपने “नजदीकी लोगों” को करोड़ों रुपये का लाभ पहुंचाया।

खेड़ा ने अपने आधिकारिक ट्वीट में लिखा:

“भ्रष्ट ठगेश की पाठशाला के 5 साल में कका ने अपने चमचों को जनसंपर्क में रजिस्टर करवा कर करोड़ों कमवाए।”

उन्होंने दो वेबसाइटों के मालिकों के नाम लेकर सीधे आरोप लगाए:

Mukhbeer.in वेबसाइट के मालिक आशुतोष शुक्ला का ज़िक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि उनका सीधा संबंध सुशील आनंद शुक्ला से है। व्हाट्सऐप प्रोफाइल और ट्रूकॉलर से संबंधित स्क्रीनशॉट भी पोस्ट किए गए हैं, जिनमें दावा किया गया है कि दिए गए नंबर पर सुशील आनंद शुक्ला की फोटो और नाम दिखता है।

NewsClubHindi.com के मालिक दुष्यंत सिंह ठाकुर के बारे में राधिका खेड़ा ने कहा कि वह छात्र है, लेकिन जनसंपर्क विभाग से लाखों रुपये हर महीने कमा रहा था। उन्होंने सवाल उठाया कि दुष्यंत सिंह के पिता कांग्रेस के मीडिया विभाग में किस पद पर हैं।

भाजपा को मिला नया मुद्दा

राधिका खेड़ा के इन आरोपों के बाद भाजपा को कांग्रेस पर हमला बोलने का एक और मुद्दा मिल गया है। खेड़ा ने पूछा कि:

  1. आशुतोष शुक्ला और सुशील आनंद शुक्ला में क्या रिश्ता है?
  1. दुष्यंत सिंह के परिवार का कांग्रेस से क्या संबंध है?
  2. जनसंपर्क विभाग से हर महीने ‘कका’ (भूपेश बघेल) तक कितना हिस्सा जाता था?
  3. क्या जनसंपर्क विभाग “डिजिटल सुपारी सेंटर” बन चुका था?

उन्होंने अपने ट्वीट में दावा किया कि सभी आरोपों के प्रमाणस्वरूप स्क्रीनशॉट और स्क्रीन रिकॉर्डिंग संलग्न कर दिए हैं ताकि “आरोपों से मुकरने” की कोई गुंजाइश न रहे।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल कांग्रेस की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन यह तय है कि मामला अब सिर्फ पत्रकार बनाम संचार प्रमुख तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके राजनीतिक मायने भी गहरे होते जा रहे हैं।

मामला कोर्ट से सड़क तक

जहाँ एक ओर पत्रकार संगठनों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर चिंता जताई जा रही है, वहीं दूसरी ओर राधिका खेड़ा के बयानों ने जनसंपर्क विभाग की कार्यशैली और वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। आगामी समय में यह मामला राजनीतिक बहस के केंद्र में रह सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed