बिहान मिशन में 31 लाख के गबन का आरोप: 5 सदस्यीय जांच दल ने पाया वित्तीय अनियमितता, अध्यक्ष और सचिव पर भी कार्रवाई की तलवा
कबीरधाम- छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के अंतर्गत ‘सत्यमेव जयते संकुल संगठन पाण्डातराई’ में ₹31 लाख की बड़ी वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। पी.आर.पी. (प्रोफेशनल रिसोर्स पर्सन) नसीमा खान के विरुद्ध 08 विभिन्न ग्राम संगठनों से नियम विरुद्ध तरीके से राशि के गबन की शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसके बाद एक जिला स्तरीय जाँच दल ने अपनी रिपोर्ट सौंपी है।

जांच रिपोर्ट में खुलासा
कबीरधाम जिले के पंचायत विभाग द्वारा प्रस्तुत जाँच प्रतिवेदन कमांक/2629/जि.पं./शिकायत/2025-26, दिनांक 26.06.2025 के अनुसार, इस गबन में कई स्तर पर अनियमितता पाई गई है। रिपोर्ट में मुख्य रूप से तीन बड़े वित्तीय लेनदेन पर उंगली उठाई गई है:
नसीमा खान को ₹6 लाख का भुगतान: जाँच में पाया गया है कि संकुल संगठन की अध्यक्ष सुनीता मानिकपुरी और सचिव इंदू के संयुक्त हस्ताक्षर से ₹6,00,000 (छः लाख रुपये) नकद आहरित कर पी.आर.पी. नसीमा खान को नियम विरुद्ध तरीके से दिए गए।
तामेश्वरी निषाद को ₹1.30 लाख: तत्कालीन पी.आर.पी. तामेश्वरी निषाद को भी ₹1,30,000 (एक लाख तीस हजार रुपये) नियम विरुद्ध तरीके से दिए जाने की बात सामने आई है।
अध्यक्ष और सचिव द्वारा स्वयं के लिए आहरण: रिपोर्ट के अनुसार, अध्यक्ष सुनीता मानिकपुरी ने स्वयं के लिए ₹3,85,000 (तीन लाख पचासी हजार रुपये) और सचिव इंदू ने ₹1,95,000 (एक लाख पंचानवे हजार रुपये) नियम विरुद्ध तरीके से नकद आहरित किए।

इन सभी अनियमितताओं के कारण कुल ₹31,00,000 (इकतीस लाख रुपये) के गबन की शिकायत के संबंध में, जाँच दल ने सुनीता मानिकपुरी और इंदू को वित्तीय अनियमितता का दोषी पाया है।
कड़ी कार्रवाई की चेतावनी
इस गंभीर वित्तीय अनियमितता के मद्देनजर, संबंधित अधिकारियों ने अध्यक्ष और सचिव को सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्हें आदेश दिया गया है कि गबन की गई उक्त शासकीय राशि को 07 दिनों के भीतर संबंधित शासकीय खाते में अनिवार्य रूप से जमा कराएं।
चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर राशि जमा नहीं की जाती है, तो उनके विरुद्ध वसूली, कुर्की एवं शासकीय राशि के गबन के लिए आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने की कार्यवाही की जाएगी। इसके लिए दोनों को स्वयं जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
इसके अतिरिक्त, सुनीता मानिकपुरी को निर्देशित किया गया है कि वे इस संबंध में अपना स्पष्टीकरण 07 दिवस के भीतर अधोहस्ताक्षरकर्ता अधिकारी के समक्ष स्वयं उपस्थित होकर प्रस्तुत करें।यह मामला छत्तीसगढ़ में ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत होने वाली वित्तीय गतिविधियों में पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़ा करता है, और इस पर आगे की कार्रवाई पर सबकी नज़र रहेगी।

