March 6, 2026

नरहैया जलाशय पर वेटलैंड प्राधिकरण सख्त, दिए जांच के आदेश

0
IMG-20250726-WA0007_copy_800x436

रायपुर – छत्तीसगढ़ राज्य वेटलैंड अथॉरिटी ने रायपुर के नरहैया तालाब पर चल रहे कार्यों को लेकर की गई शिकायत को संज्ञान में लेकर कलेक्टर एवं अध्यक्ष जिला वेटलैंड संरक्षण समिति रायपुर को प्रकरण की जांच कर आद्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) रूल्स 2017 के उल्लंघन की स्थिति में नियम अनुसार कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं। प्राधिकरण ने यह भी कहा है की वस्तुस्थिति से प्राधिकरण को अवगत कराया जावे।

क्या है मामला

रायपुर के ईएनटी विशेषज्ञ एंव सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. राकेश गुप्ता ने 15 मई को वेटलैंड प्राधिकरण को शिकायत की थी कि रायपुर नगर पालिक निगम द्वारा नरहेश्वर वेटलैंड (जिसे आमतौर पर नरहैया तालाब, टिकरापारा, रायपुर के नाम से जाना जाता है) में टॉय ट्रेन के लिए रेल ट्रैक का निर्माण का प्रस्ताव रखा है और इसके लिए नगर निगम ने वहां बिछाए गए पेवर हटाने का काम चालू कर दिया है। शिकायत में बताया गया था कि ये पेवर भी नियमों का उलंघन कर उच्चतम औसत बाढ़ स्तर के 50 मीटर के दायरे में बिछाए गए थे। गौरतलब है कि नरहैया तालाब का संरक्षण मान. सर्वोच्च न्यायालन के आदेश अनुसार आद्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) रूल्स 4 के तहत किया जाना है। नरहैया तालाब 2.25 हेक्टर से बड़ा है और यहाँ मान. सर्वोच्च न्यायालन का आदेश लागू होता है। रूल 4 के अनुसार दिसम्बर 2000 से अब तक के उच्चतम औसत बाढ़ स्तर के 50 मीटर के अन्दर कोई भी स्थाई निर्माण नहीं हो सकता है जबकि टॉय ट्रेन स्थाई निर्माण रेल ट्रैक का निर्माण 50 मीटर के अंदर किया जाना प्रस्तावित है, पेवर लगाना भी स्थाई निर्माण की श्रेणी में आता है ये पेवर भी 50 मीटर के अंदर लगाए गए थे। डॉ गुप्ता ने शिकायत में कहा कि स्थायी निर्माण से जुड़ी ऐसी गतिविधि से वेटलैंड का पारिस्थितिक चरित्र नष्ट हो जाएगा।

शिकायत पत्र में डॉ गुप्ता ने लिखा कि कलेक्टर रायपुर द्वारा रायपुर के सभी तालाबों की जांच कर रिपोर्ट नहीं दी जा रही है। गौरतलब है कि वेटलैंड अथॉरिटी ने रायपुर के सभी तालाबों की जांच करने के आदेश 08 मई 2023 में दिए थे। डॉ. गुप्ता ने चर्चा में बताया कि नया रायपुर के सेंध और झांझ जलाशय की तबाही वहां की जांच रिपोर्ट में उजागर हो गई है। जिसके उपरान्त वेटलैंड प्राधिकरण ने कलेक्टर रायपुर को न्यायलय में पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम के तहत परिवाद दायर करने के आदेश दिए हैं। पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम के तहत दोषी पाए जाने पर पांच साल की सजा या रु. एक लाख का जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। गुप्ता ने कहा कि रायपुर के सभी तालाबों की जांच अगर की जाती है तो नगर निगम के कई अधिकारी तालाबों की तबाही के लिए दोषी पाए जायेंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed