छत्तीसगढ़ कांग्रेस में संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला को लेकर घमासान, पद से हटाने की अटकलें तेज
रायपुर – छत्तीसगढ़ कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति एक बार फिर गरमाई हुई है। इस बार चर्चा का केंद्र बने हैं पार्टी के संचार विभाग के प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला। सूत्रों के अनुसार, पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी उनके प्रति लगातार बढ़ती जा रही है। खास तौर पर नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत, पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव, सत्यनारायण शर्मा, शिव डहरिया पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम अमरजीत भगत और जय सिंह अग्रवाल जैसे दिग्गज नेताओं ने सुशील आनंद शुक्ला पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के करीबी होने और सिर्फ उन्हीं की सुनने का आरोप लगाया है।
बढ़ती नाराजगी और भीतरखाने की खींचतान
जानकारी के मुताबिक, सुशील आनंद शुक्ला के कार्यशैली को लेकर लंबे समय से पार्टी के भीतर नाराजगी है। बड़े नेताओं का आरोप है कि वे संगठन के बाकी वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी करते हैं और केवल भूपेश बघेल के इशारे पर काम करते हैं। इसी को लेकर कई बार पार्टी की बैठक में बहस और तनातनी की स्थिति भी बनी है।
प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज भी कथित रूप से सुशील आनंद शुक्ला से खफा बताए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और दीपक बैज के बीच तनातनी का असर मीडिया विभाग पर भी पड़ा है। बताया जा रहा है कि हाल ही में रायपुर दौरे पर आए राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से भी नेताओं ने इस मुद्दे की शिकायत की थी, जिस पर खड़गे ने नाराजगी भी जताई थी।
पद से हटाने की अटकलें और संभावित नामों की चर्चा
अब कांग्रेस के भीतर चर्चा है कि जल्द ही सुशील आनंद शुक्ला को मीडिया प्रभारी के पद से हटाया जा सकता है। दिल्ली सूत्रों के मुताबिक, इस पद के लिए जिन नामों पर मंथन चल रहा है, उनमें विकास तिवारी सबसे आगे बताए जा रहे हैं। वहीं धनंजय ठाकुर, सुरेंद्र वर्मा और पूर्व मीडिया प्रमुख शैलेष नितिन त्रिवेदी के नाम भी चर्चा में हैं।
राधिका खेड़ा विवाद भी बना मुद्दा
इसके साथ ही सुशील आनंद शुक्ला और पूर्व कांग्रेस नेत्री राधिका खेड़ा से विवाद हुआ उस विवाद का ऑडियो भी सोशल मीडिया में वायरल हुआ जिसमें जमकर गाली गलौज की बातें सामने आई थी और राधिका खेड़ा कांग्रेस भवन से रोते हुए निकली थी और कई तरह के आरोप भी लगाए थे (जो अब भाजपा में शामिल हो चुकी हैं) के बीच हुए विवाद को भी मुद्दा बनाया जा रहा है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि शुक्ला का व्यवहार और अकड़,और बत जुबानी लंबे समय से पार्टी के भीतर असंतोष का कारण बना हुआ है।
मीडिया से रिश्ते भी सवालों के घेरे में
पार्टी संगठन के भीतर यह शिकायत भी बार-बार उठती रही है कि सुशील आनंद शुक्ला की सिर्फ मुख्यधारा की बड़ी मीडिया संस्थानों से नजदीकी है, जबकि क्षेत्रीय मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और छोटे अखबार-वेबसाइट्स के साथ उनका व्यवहार अच्छा नहीं है। इसे लेकर भी कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने संगठन में शिकायत दर्ज कराई है।
अंतिम फैसला जल्द संभव
कांग्रेस संगठन के सूत्रों की मानें तो जल्द ही इस मामले में बड़ा फैसला हो सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि छत्तीसगढ़ कांग्रेस के संचार विभाग की कमान किसके हाथ में सौंपी जाती है, क्योंकि यह पद न केवल संगठन की आवाज होता है, बल्कि पार्टी की दिशा-दशा तय करने में भी अहम भूमिका निभाता है।

