March 6, 2026

फर्जीवाड़ा का खुलासा: श्रम विभाग का कमाल, एक आधार कार्ड पर दो श्रमिक कार्ड, सीएससी सेंटर और श्रम विभाग की मिलीभगत से खुला फर्जीवाड़े का राज, विभागीय संरक्षण मे हो रहा योजना का दुरूपयोग

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रिपोर्टर – शशिकांत देवांगन

राजनांदगांव – श्रमिक कल्याण योजनाओं की पारदर्शिता और विश्वसनियाता को करारा झटका देते हुए डोंगरगाँव क्षेत्र के आतरगाँव के सीएससी सेंटर और विभाग के मिलीभगत से श्रम कार्ड पंजीयन से जुडा एक सुनियोजित और गंभीर फर्जीवाड़ा उजागर हुआ हैं. जहाँ एक आधार पर दो श्रमिक कार्ड बना हैं. इस फर्जीवाडे में न केवल सरकारी नियमों की धज्जिया उड़ाई बल्कि सीएससी (कमान सर्विस सेंटर)और श्रम विभाग के अधिकारियो की संलिप्ता पर भी सवाल उठ खड़े हुये हैं.

मिली जानकारी के अनुसार ग्राम पाण्डुका निवासी श्रमिक गोविन्द दास साहू ने पहले असंगठित कर्मकांर के रूप में पंजीयन कराया था (पंजीयन क्रमांक 427392730) बाद में उसने संगठित श्रम कार्ड भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकांर कार्ड)बनवाने के लिए आतारगाव स्थित सीएससी संचालक कमलेश कुमार साहू को अपने आधार और दस्तावेज सौपे वही हितग्राही ने दावा किया हैं.की इस प्रक्रिया के लिए कमलेश साहू को दो हजार पांच सौ रूपये नगद भुगतान भी किया था इसके बाद मात्र पांच दिनों में नया संगठित श्रम कार्ड बनकर तैयार हो गया (पंजीयन क्रमांक 421812819) इस प्रक्रिया में भारी अनियमितता यह हैँ की पहले श्रमिक के पुराने असंगठित पंजीयन को दुर्ग जिले में स्थानातरित कर दिया गया और फिर उसी आधार कार्ड का इस्तेमाल कर राजनांदगाँव जिले में नया पंजीयन कर दिया परिणाम स्वरुप एक ही व्यक्ति के नाम पर दो जिलों में दो श्रम कार्ड बनकर तैयार हो गया

यह मामला केवल एक व्यक्ति के साथ धोखाधड़ी का नहीं बल्कि सार्वजनिक योजनाओं की साख और गरीब श्रमिकों के अधिकारों का बड़ा हमला है इससे यह स्पष्ट होता है कि सीएससी और ग्रामीण कियोस्को की आड़ में कुछ संचालक योजनाओं का दुरुपयोग कर रहे हैं और विभागीय अधिकारी भी यह तो लापरवाह है या मिलीभगत में शामिल है?इस घटना में श्रम विभाग की कार्यकारिणी प्रक्रियागत पारदर्शिका और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं डोंगरगाँव का यहां मामला केवल एक उदाहरण नहीं बल्कि व्यवस्था में गहरे बैठे भ्रष्ट तंत्र की बानगी है अगर समय रहते ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो यह फर्जीवाड़े सैकड़ो- हजारों की जरूरतमंद श्रमिकों को योजनाओं से वंचित कर देंगे और भरोसे की इस पूरे प्रणाली को खोखला बना देगा।

यह बड़ा सवाल अब शासन और श्रम विभाग के समक्ष खड़ा है नियमों के अनुसार असंगठित श्रमिकों का पंजीयन और भवन निर्माण श्रमिकों का पंजीयन दोअलग प्रक्रिया है और इसमें एक से दूसरे में सीधा रूपांतरण संभव नहीं है फिर भी इस मामले में प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए केवल दस्तावेजों के आधार पर संगठित श्रम कार्ड जारी कर दिए गया यह भी सिर्फ 5 दिनों में जो विभागीय मिलीभगत की ओर इशारा करता है इस मामले में मुख्य आरोपी कौन है?सीएससी संचालक या श्रम निरीक्षक या अधिकारी, जिसके स्तर से फर्जी पंजीयन पारित हुआ है इतनी तेज प्रक्रिया विभागीय सहमति, विभागीय और प्रशासनिक जांच की अनुशंसा के बिना संभव ही नहीं

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