माना बंग हिंदू श्मशान घाट के अस्तित्व पर संकट…समाज में आक्रोश..
रायपुर – माना बंग हिंदू समाज द्वारा शासन को दिए गए आवेदन के बाद श्मशान घाट का सीमांकन किया जाना था। इसके लिए राजस्व निरीक्षक (आर.आई.), नहर पटवारी और संबंधित कर्मचारी स्थल पर पहुंचे। लेकिन जब उन्होंने समाज के प्रतिनिधियों को बताया कि खसरा रिकॉर्ड में माना बंग हिंदू श्मशान घाट का कोई उल्लेख नहीं है, तो सभी स्तब्ध रह गए।

समाज का यह श्मशान घाट वर्ष 1964 से लगातार उपयोग में लाया जा रहा है। इसके बावजूद, राजस्व दस्तावेज़ों में इसका अस्तित्व ही नकारा जा रहा है। दूसरी ओर, खसरा नंबर 261 को “बनारसी श्मशान घाट” और 371 को “ईसाई कब्रिस्तान” के रूप में ऑनलाइन दिखाया जा रहा है। यह स्थिति समाज के आत्मसम्मान और सांस्कृतिक विरासत पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।

समाज के लोगों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि आखिर इतने वर्षों से चली आ रही परंपरा और उपयोग के बावजूद उनकी भूमि को अधिकारिक मान्यता क्यों नहीं मिली? कई लोगों का मानना है कि समाज को जानबूझकर राजनीतिक बहसों में उलझाकर उसके मूल मुद्दों से भटकाया गया है।

समाज के लोगों ने एकजुट होकर इस अभियान में योगदान देने की अपील की है और उन लोगों को चिन्हित करने की बात कही है जो समाज को नुकसान पहुंचा रहे हैं। अब देखना यह है कि शासन इस मामले में क्या कार्रवाई करती है और समाज के लोगों की मांगों को कितना महत्व देती है।
वही इस पूरे मामले में पटवारी सोनम ठाकुर का कहना है कि पुराना रिकार्ड चेक करना पड़ेगा। उसके बाद ही मैं बोल सकती हूं। वैसे तो शासकीय भूमि पर है उसके नाम से दर्ज है कि नही ये देखना पड़ेगा. श्मशान घाट आवंटन नही हुआ है ये जमीन एयरपोर्ट के अंर्तगत है।

