खबर का असर – तर्री में अवैध रेत खनन पर प्रशासन की कार्रवाई, माफियाओं का रेम तोड़ा
छत्तीसगढ़ – नवापारा राजिम की ग्राम पंचायत तर्री में महानदी घाट पर अवैध रेत खनन के खिलाफ प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है। राजस्व और खनिज विभाग की संयुक्त टीम ने रेत माफियाओं द्वारा बनाए गए रेम को कई स्थानों पर तोड़ दिया। इस कार्रवाई में नायब तहसीलदार सृजन सोनकर, खनिज सुपरवाइजर सुनीलदत्त शर्मा और पटवारी उपस्थित थे। यह कार्रवाई हमारे बेव पोर्टल में अवैध खनन की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित करने के बाद हुई, जो NGT के 10 जून, 2025 से लागू खनन प्रतिबंध के साथ संरेखित है।

हाल के दिनों में रेत माफियाओं द्वारा पत्रकारों और ग्रामीणों पर किए गए जानलेवा हमलों ने इस समस्या की गंभीरता को और उजागर किया है। यह कार्रवाई पहले की तुलना में अधिक प्रभावी है, क्योंकि पूर्व में की गई कार्रवाइयों में रेम को नहीं हटाया गया था। यह कदम 10 जून, 2025 से शुरू हुए NGT के मानसून खनन प्रतिबंध के समय में उठाया गया, जो पर्यावरण और नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के लिए लागू किया गया है। NGT के पर्यावरण नियमों के तहत, मानसून के दौरान नदियों की रक्षा के लिए 10 जून, 2025 से 15 अक्टूबर, 2025 तक रेत खनन पर पूर्ण प्रतिबंध है।

अवैध खनन को लेकर प्रकाशित खबर ने प्रशासन को त्वरित कार्रवाई के लिए प्रेरित किया, जो दर्शाता है कि मीडिया की सक्रियता ने माफियाओं पर नकेल कसने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालांकि, यह सवाल भी उठता है कि ऐसी कार्रवाई पहले क्यों नहीं हुई, जो प्रशासन की समयबद्धता पर सवाल उठाता है।
हाल के दिनों में, छत्तीसगढ़ में रेत माफियाओं की हिंसा ने चिंता बढ़ा दी है। 9 जून, 2025 को गरियाबंद जिले के पीतईबंद गांव में अवैध रेत खनन की खबर कवर करने गए पत्रकारों इमरान मेमन, थानेश्वर साहू और जितेंद्र सिन्हा पर माफियाओं ने रॉड से जानलेवा हमला किया, उनकी गाड़ी तोड़ी, कैमरे-मोबाइल छीने और जान से मारने की धमकी दी। इस खदान को एक महीने पहले कलेक्टर ने बंद करवाया था,
लेकिन यह फिर से चालू हो गई, जिससे सवाल उठता है कि यह किसके इशारे पर हुआ। इसके अलावा, 11 जून, 2025 को राजनांदगांव जिले के मोहड़ में रेत माफियाओं ने ग्रामीणों पर गोलीबारी की, जिसमें तीन युवक गंभीर रूप से घायल हुए और एक युवक का सिर गोली से छूकर निकला। यह घटना अवैध खनन के खिलाफ ग्रामीणों के विरोध के बाद हुई। ये हमले दर्शाते हैं कि रेत माफिया न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि समाज के लिए भी खतरा बन गए हैं।

तर्री में अवैध खनन को ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधियों और जनपद नेताओं का संरक्षण प्राप्त था, जिसने इसे फलने-फूलने में मदद की। रेत माफियाओं ने नदियों को भारी नुकसान पहुंचाया और सरकारी राजस्व को करोड़ों रुपये का चूना लगाया। पूरे छत्तीसगढ़ में नदियों का सत्यानाश और पर्यावरणीय क्षति एक गंभीर मुद्दा बन गया है। प्रशासन की कार्रवाई स्वागत योग्य है, लेकिन NGT नियम लागू होने से ठीक पहले की गई इस कार्रवाई की समयबद्धता पर सवाल उठ रहे हैं।
पत्रकारों और ग्रामीणों पर हाल के हमले रेत माफियाओं की बेलगाम हिंसा को दर्शाते हैं, जो स्थानीय संरक्षण और भ्रष्टाचार के कारण और बढ़ रही है। रेत माफियाओं के खिलाफ स्थायी समाधान के लिए सख्त निगरानी, पारदर्शी प्रवर्तन और स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार पर लगाम जरूरी है।छत्तीसगढ़ में रेत माफियाओं के काले कारनामों और हिंसक गतिविधियों पर पूर्ण अंकुश लगाने के लिए सुशासन की असली परीक्षा अभी बाकी है।
पत्रकारों और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और अवैध खनन को जड़ से खत्म करना समय की मांग है। क्या प्रशासन इस चुनौती का सामना कर पाएगा? यह आने वाला समय बताएगा। हम इस मुद्दे पर पैनी नजर रखेंगे और जनता को हर अपडेट से अवगत कराते रहेंगे।

