तर्री में रेत माफियाओं का आतंक, पत्रकारों पर हमले के बाद भी बेलगाम अवैध खनन
रायपुर – गोबरा नवापारा और राजिम के आसपास के क्षेत्र, विशेष रूप से तर्री में रेत माफियाओं का आतंक चरम पर है। हाल ही में पत्रकारों पर हुए जानलेवा हमले की घटना ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है, लेकिन इसके बावजूद अवैध रेत खनन का धंधा थमने का नाम नहीं ले रहा। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि रेत माफिया न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि क्षेत्र में भय का माहौल भी बना रहे हैं।

ग्रामीणों का आरोप: रेत माफियाओं का खुला खेल
तर्री क्षेत्र के ग्रामीणों ने बताया कि रात को 40 से 50 हाइवा रेत खनन के लिए क्षेत्र में पहुंचे। प्रशासन को दी, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का कहना है कि विगत कई महीनों से रेत माफिया इस क्षेत्र में अवैध खनन कर रहे हैं, जिसके कारण नदी सूख गए हैं और पर्यावरण को भारी नुकसान हुआ है संकट मंडरा रहा है। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि रेत माफिया स्थानीय लोगों को धमकाते हैं और उनके खिलाफ आवाज उठाने वालों को निशाना बनाते हैं।
आवेदन पत्र में खुलासा: 30 मई को दी गई थी शिकायत
इस मामले में एक आवेदन पत्र भी सामने आया है, जो ग्राम पंचायत तर्री निवासियों ने उच्च अधिकारियों को शिकायत किया है पत्र में लिखा गया है कि रेत माफियाओं ने क्षेत्र में आतंक मचा रखा है। पत्र के अनुसार, 30 मई 2025 को सुशासन तिहार में इसकी शिकायत दर्ज की गई थी, लेकिन दो सप्ताह बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने मांग की है कि रेत माफियाओं के कारोबार अवैध खनन पर रोक लगाई जाए।

सुशासन की पोल खुली: प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल
एक तरफ छत्तीसगढ़ सरकार सुशासन और पारदर्शी प्रशासन का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ रेत माफियाओं की बेलगाम गतिविधियां सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की लापरवाही के कारण रेत माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। स्थानीय निवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतने बड़े पैमाने पर अवैध खनन संभव नहीं है।
एसडीएम अभनपुर ने खनिज विभाग को भेजने की बात कहीं, हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे बयान पहले भी कई बार दिए जा चुके हैं, लेकिन धरातल पर कोई बदलाव नहीं आया।
आगे क्या?
अब सवाल यह है कि सुशासन का दावा करने वाली सरकार और प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। ग्रामीणों की नजरें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या रेत माफियाओं पर लगाम लगेगी, या यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा? यह देखना होगा कि प्रशासन इस चुनौती से कैसे निपटता है।

