एआईसीसी महासचिव एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पत्रकारों से चर्चा
रायपुर – एआईसीसी महासचिव एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि प्रदेश में भीषण गर्मी पड़ रही है जिसके चलते भू-जल स्तर बहुत नीचे जा रहा है। गांव हो या शहर हो बोरवेल सूख रहा है। सरकार सुशासन तिहार की बात कह रही है लेकिन बिजली की आपूर्ति लचर है बेहद खराब है। बिजली कटौती बहुत हो रही है जिसकी कोई सीमा नहीं है। आम जनता पेयजल की भीषण संकट का सामना कर रही है। वहीं किसान अपने फसल बचाने के लिए जूझ रहा है, हजारो एकड़ फसल बर्बाद हो गये है। पहले शहरों में टैंकर चलते थे लेकिन अब गांवों में भी टैंकर की जरूरत पड़ने लगी है। जितने भी औद्योगिक शहर है वहां केमिकल युक्त पानी आ रही है, चाहे भिलाई हो, चाहे भिलाई चरोदा हो, चाहे आसपास के गांव हो सब जगह बदबूदार पानी रसायन मिला हुआ जहरीला पानी पीने के लिए आम जनता मजबूर है। पेयजल की स्थिति बेहद भयावह है। कई जगह पानी की टंकी बन गये है लेकिन कनेक्शन नहीं हुआ है, पूर्ण होने का प्रमाण पत्र मिल गया है लेकिन घर में नल कनेक्शन के बाद पानी भी नहीं आ रहा है। दूसरी तरफ मनरेगा के नये काम नहीं चल रहा है जो पुराने काम है वही चल रहा है। 18 लाख पीएम आवास की बात कह रहे है, पिछले सत्र में विधायक उमेश पटेल ने बात उठाया था कि डेढ़ लाख की राशि से मकान नहीं बन पाते, निर्माण समाग्री महंगी हो गयी है। सीमेंट, स्टील के दाम आसमान छू रहे है, यह राशि बढ़कार ढाई लाख किया जाना चाहिये। कानून व्यवस्था को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के द्वारा मुख्यमंत्री निवास का घेराव किया गया। नाबालिक बच्ची से लेकर आम जनता तक सुरक्षित नहीं है। बेहद भयावह स्थिति है।
राष्ट्रीय स्तर की बात करे तो राष्ट्रीय सुरक्षा आज का सबसे बड़ा मुद्दा है। देश की सुरक्षा और देश की नागरिकों की सुरक्षा सरकार में बैठे हुये लोग अपने को चौकीदार बताते थे लेकिन 26 आम नागरिक पहलगाम में सरकार के लापरवाही और पर्यटकों की सुरक्षा में चूक के कारण उनकी मौत हो गयी। एक सप्ताह बीत गया लेकिन सरकार इसके लिए कौन जिम्मेदार है ये तय नहीं कर पाये। पूरा विपक्ष एकजुट होकर सरकार के साथ खड़ी हुयी है। आम आदमी मीटिंग भी बुलाने के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष खड़गे जी ने कहा था, सरकार ने बात मानी लेकिन अध्यक्षता रक्षा मंत्री ने किया, गृह मंत्री जी उपस्थित थे लेकिन प्रधानमंत्री जी बिहार चुनाव प्रचार में लगे हुये थे। पहले की स्थिति अलग थी, आज पूरा कश्मीर आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ खड़ा है, सड़को पर उतरकर कैंडल मार्च कर रहे है, गांव से लेकर शहरो तक जिला स्तरों पर भी वहां के लोगों ने विरोध किया। जम्मू-कश्मीर में एक दिन का विशेष सत्र बुलाकर कड़ी निंदा की, लेकिन केंद्र सरकार अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं कर पा रही है। पूरी दुनिया को आतंकवाद के खिलाफ देश की एकजुटता का संदेश संसद से जाना चाहिये। जम्मू-कश्मीर में विशेष सत्र हो सकता है तो देश के लोकसभा, राज्यसभा के विशेष सत्र क्यों नहीं बुलाया जा सकता?
एआईसीसी महासचिव एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष खड़गे जी और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पत्र लिखा है कि विशेष सत्र बुलाया जाये। इस सत्र के माध्यम से देश एक बार फिर से अपनी एकजुटता और देश की रक्षा के लिये संकल्पित होंगे। सरकार खुद से कदम क्यों नहीं उठा रही है ये सोचने का विषय है। भारतीय जनता पार्टी के नेता अभी भी विषवमन करने में पीछे नहीं हट रहे है। लगातार विषवमन कर रहे है इससे आपस में जो लड़ाई है उसी का लाभ ये आतंकवादी और अलगाववादी उठा रहे है। इससे बचने के लिए एकजुट होने के लिए पॉर्लियामेंट की विशेष सत्र बुलाई जाये। आतंकवादियों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव भी पारित करे। जिनके शह पर हो रहा है उससे लड़ने के लिये कारगर कदम उठाने के लिए निश्चित रूप से लोकसभा और राज्यसभा से संकल्प पारित हो। जिससे और कारगर ढंग से कार्यवाही हो सके।

