March 6, 2026

IOB में 1.65 करोड़ का घोटाला, EOW ने बैंक मैनेजर समेत दो क्लर्कों को पकड़ा

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छत्तीसगढ़ – गरियाबंद जिले की इंडियन ओवरसीज बैंक (राजिम शाखा) में सामने आए करोड़ों के फर्जी ज्वेलरी लोन घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने इस घोटाले के मास्टरमाइंड माने जा रहे तत्कालीन बैंक प्रबंधक सुनील कुमार को बिहार से गिरफ्तार किया है। साथ ही बैंक के दो लिपिक – खेमन लाल कंवर और योगेश पटेल को भी हिरासत में लिया गया है। इससे पहले इस घोटाले में शामिल सहायक प्रबंधक अंकिता पाणिग्रही को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।

यह मामला वर्ष 2022 का है, जब बैंक अधिकारियों ने 11 किसानों के नाम पर फर्जी ज्वेल लोन पास करवाए और वह राशि सीधे अपने खातों में ट्रांसफर कर दी। कुल 1.65 करोड़ रुपये के इस घोटाले का खुलासा तब हुआ, जब कुछ खाताधारकों को उनके नाम पर लोन जारी होने की जानकारी मिली और उन्होंने इसकी शिकायत EOW से की।

शिकायत को गंभीरता से लेते हुए ACB चीफ अमरेश मिश्रा के निर्देश पर जांच शुरू की गई। इस दौरान यह सामने आया कि लोन की प्रक्रिया बिना नियमों के पूरी की गई थी और खातों का उपयोग केवल गबन के लिए किया गया।

8 अप्रैल को ओडिशा में रेड मारकर EOW ने बैंक की तत्कालीन सहायक प्रबंधक अंकिता पाणिग्रही को गिरफ्तार किया। पूछताछ में अंकिता ने कबूला कि उसने सुनील कुमार और अन्य दोनों लिपिकों के साथ मिलकर यह फर्जीवाड़ा किया।

चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि अंकिता पाणिग्रही ने यह सारा पैसा Zerodha नामक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म में निवेश किया था। उसने फ्यूचर्स और ऑप्शन स्कीम में भारी ट्रेडिंग कर दी, जिससे पूरा पैसा डूब गया। इससे बैंक को गंभीर वित्तीय नुकसान हुआ।

EOW की टीम ने आरोपी सुनील कुमार को बिहार से गिरफ्तार किया और रायपुर लाकर कोर्ट में पेश किया। वहीं, दोनों लिपिकों खेमन लाल कंवर और योगेश पटेल को भी गिरफ्तार कर 8 दिन की पुलिस रिमांड (29 अप्रैल तक) पर भेजा गया है। तीनों से लगातार पूछताछ जारी है और माना जा रहा है कि मामले में और भी कई खुलासे हो सकते हैं।

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