March 8, 2026

झांज जलाशय: सरकारी नुमाइनदे नया रायपुर बेचने के लिए जनता को कर रहे गुमराह- डॉ.गुप्ता

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रायपुर – झांज जलाशय नया रायपुर को लेकर एक सरकारी अधिकारी द्वारा एक अंग्रेजी पेपर को दिए गए बयान के बाद फिर विवाद में आ गया है। वास्तव में 18 फरवरी को रायपुर के डॉक्टर राकेश गुप्ता ने झांज जलाशय से लगकर किये जाने वाले विकास कार्यों के लिए जारी किए गए टेंडर जिसके, तहत बिल्डरों को जमीन दी जानी है, पर आपत्ति दर्ज कर सभी अधिकारियों को पत्र लिखकर कार्यों को निरस्त करने की मांग की थी। झांज जलाशय माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एम.के.बालकृष्णन बनाम यूनियन के आदेशों के तहत एक अधिसूचित वेटलैंड है। जहां पर आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2010 और नियम 2017 लागू होते हैं, जिसके तहत वर्ष 2000 से अभी तक के औसत हाईएस्ट फ्लड लेवल से 50 मीटर के अन्दर कोई भी स्थाई निर्माण नहीं किया जा सकता। अटल नगर नया रायपुर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सी.ई.ओ.) ने एक अंग्रेजी पेपर को बताया कि प्रस्तावित विकास कार्य नया रायपुर के मास्टर प्लान और बफर जोन के प्रावधानों के अनुसार किया जायेगा। इस पर डॉक्टर गुप्ता ने सी.ई.ओ. से प्रश्न पूछा है कि अगर मास्टर प्लान सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों और कानून के विरुद्ध बना हुआ है तो क्या वे सर्वोच्च न्यायालय के आदेश और क़ानून को नहीं मानेंगे?

चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर ने कहा की झांज जलाशय रामसर साइट नहीं है और उन 1308 संवेदनशील आद्र भूमियो में से नहीं है जो कि उनके द्वारा बताई गई वेबसाइट में हैं। इस पर डॉक्टर गुप्ता ने कहा कि झांज जलाशय अगर रामसर साइट नहीं है और संवेदनशील आद्रभूमि नहीं है तो क्या नया रायपुर के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर उसे तबाह कर देंगे? जबकि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार झांज जलाशय एक अधिसूचित एंव संरक्षित आद्रभूमि है जिसकी वेटलैंड अथॉरिटी की इन्वेंटरी में इन्वेंटरी क्रमांक CG008624 है। गुप्ता ने पूछा कि अगर झांज जलाशय कानूनन संरक्षित आद्र भूमि नहीं है तो फिर छत्तीसगढ़ राज्य वेटलैंड अथॉरिटी ने उसे अपनी इन्वेंटरी में क्यों जोड़ रखा है? क्या नया रायपुर के अधिकारी बता सकते हैं कि जब ढाई साल पहले झांज जलाशय को तबाह करने की तैयारी चली चालू की गई थी तब वेटलैंड अथॉरिटी ने जिला आद्रभूमि संरक्षण समिति जिसके अध्यक्ष कलेक्टर रायपुर होते हैं को जांच का आदेश क्यों दिया था, अगर झांज जलाशय अधिसूचित और संरक्षित आद्रभूमि नहीं है तो वेटलैंड अथॉरिटी ने जांच के आदेश क्यों दिए? झांज जलाशय की जांच रिपोर्ट कलेक्टर रायपुर ने किसके कहने पर रोक रखी है?

चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर ने कहा कि चल रहे देशव्यापी आद्र भूमि सर्वेक्षण से टेंडरिंग प्रोसेस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। डॉक्टर गुप्ता ने कहा की देशव्यापी आद्र भूमि सर्वेक्षण के तहत 2.25 हेक्टर से बड़ी सभी आद्रभूमि की जमीनी सच्चाई और सीमांकन माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश अनुसार चल रहा है जिसे तीन महीने के भीतर यानी 13.03.2025 तक पूरा किया जाना है। उसके बाद भी अधिकारी द्वारा यह बयान दिया जाना बताता है कि वे माननीय न्यायालय के आदेशों की कितना सम्मान करते हैं।

डॉक्टर गुप्ता ने कहा कि हाल ही में उच्च न्यायालय के समक्ष एक अधिकारी ने कहा था कि वे ने न्यायालय के आदेश को नहीं समझ सके। जिसपर सुनवाई के दौरान नाराजगी प्रकट की गई थी जो की चर्चा का विषय बनी रही, उन्होंने कहा कि इस घटना से अधिकारी वर्ग को सबक लेना चाहिए और न्यायालयों के आदेश को समझ कर उनका सम्मान करना चाहिए। गुप्ता ने चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर को चुनोती दी कि जो बयान उन्होंने अंग्रेजी अखबार को दिया है वो क्या लिखित में देंगे ताकि उनका बयान रिकॉर्ड में रहे। गुप्ता ने मांग की है कि चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर अपने दिए गए बयान को वापस ले तथा जनता से माफी मांगे।

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