May 17, 2026

छत्तीसगढ़ को मिला नया डीजीपी, अरुण देव गौतम संभालेंगे पुलिस की कमान

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रायपुर – छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक और पुलिस व्यवस्था से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी Arun Dev Gautam को राज्य का पूर्णकालिक पुलिस महानिदेशक (DGP) नियुक्त किया है। गृह विभाग द्वारा इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है। उनकी नियुक्ति को राज्य पुलिस नेतृत्व में बड़े बदलाव और मजबूत प्रशासनिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

1992 बैच के आईपीएस अधिकारी अरुण देव गौतम मूल रूप से उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले से आते हैं। अपने लंबे प्रशासनिक और पुलिस करियर में उन्होंने छत्तीसगढ़ पुलिस को कई महत्वपूर्ण दौर में नेतृत्व दिया है। शांत स्वभाव, सख्त प्रशासनिक क्षमता और जमीनी पुलिसिंग की समझ के कारण वे पुलिस महकमे में बेहद सम्मानित अधिकारी माने जाते हैं।

अरुण देव गौतम राज्य के उन चुनिंदा अधिकारियों में शामिल रहे हैं जिन्होंने लंबे समय तक गृह सचिव जैसे अहम पद की जिम्मेदारी संभाली। वे छत्तीसगढ़ में सबसे लंबे समय तक गृह सचिव के पद पर कार्य करने वाले अधिकारियों में गिने जाते हैं। शासन और पुलिस प्रशासन दोनों में उनकी गहरी पकड़ को देखते हुए सरकार ने उन्हें राज्य पुलिस की सर्वोच्च जिम्मेदारी सौंपी है।

छह जिलों में एसपी, बस्तर में संभाली बड़ी जिम्मेदारी

अपने करियर के दौरान गौतम छह जिलों में पुलिस अधीक्षक (SP) रह चुके हैं। उन्होंने फील्ड पुलिसिंग से लेकर प्रशासनिक स्तर तक हर जिम्मेदारी को प्रभावी तरीके से निभाया। विशेष रूप से बस्तर जैसे नक्सल प्रभावित संवेदनशील इलाके में उनका कार्यकाल काफी चर्चित रहा।

झीरम घाटी नक्सल हमले के बाद जब बस्तर की स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई थी, उस समय अरुण देव गौतम को बस्तर रेंज का आईजी नियुक्त किया गया था। उस दौर में पूरे क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियां चरम पर थीं। नक्सली घटनाओं के कारण आम लोगों में भय का माहौल था और प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखना बड़ी चुनौती थी।
ऐसे कठिन समय में गौतम ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया बल्कि पुलिस और आम जनता के बीच विश्वास कायम करने का भी प्रयास किया। उनके नेतृत्व में सुरक्षा रणनीतियों को नए तरीके से लागू किया गया, जिसका असर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में देखने को मिला।

2013 विधानसभा चुनाव बना बड़ी उपलब्धि

अरुण देव गौतम के प्रशासनिक करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में 2013 का विधानसभा चुनाव भी शामिल माना जाता है। उस समय नक्सल प्रभावित इलाकों में शांतिपूर्ण मतदान कराना प्रशासन के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण काम था। लगातार नक्सली धमकियों और हमलों के खतरे के बीच सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाकर चुनाव प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा कराया गया।

बताया जाता है कि उनके नेतृत्व में कई नक्सल प्रभावित इलाकों में मतदान प्रतिशत में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। इसे लोकतंत्र के प्रति लोगों के बढ़ते विश्वास और बेहतर सुरक्षा प्रबंधन का परिणाम माना गया।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान

अरुण देव गौतम को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है। वर्ष 2002 में कोसोवो शांति मिशन में सेवाएं देने के लिए उन्हें संयुक्त राष्ट्र पदक (UN Medal) से सम्मानित किया गया था। यह सम्मान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी पेशेवर क्षमता और अनुशासित सेवा का प्रतीक माना जाता है।

इसके अलावा वर्ष 2010 में उन्हें भारतीय पुलिस पदक प्रदान किया गया। वहीं 2018 में उन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक (विशिष्ट सेवा) से भी सम्मानित किया गया। ये सम्मान उनकी कार्यकुशलता, नेतृत्व क्षमता और समर्पित सेवा को दर्शाते हैं।

कानून-व्यवस्था और नक्सल मोर्चे पर बढ़ी उम्मीदें

अरुण देव गौतम की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब राज्य में कानून-व्यवस्था और नक्सल विरोधी अभियानों को और अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है। माना जा रहा है कि उनके लंबे अनुभव का फायदा राज्य पुलिस को मिलेगा। खासकर नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े मामलों में उनकी रणनीतिक समझ महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

प्रशासनिक हलकों में यह भी चर्चा है कि गौतम की कार्यशैली संतुलित और परिणाम आधारित रही है। वे फील्ड अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर काम करने के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में उनकी नियुक्ति से पुलिस महकमे में नई ऊर्जा और स्पष्ट नेतृत्व मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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