पदभार संभालते ही एक्शन में आए ग्रामोद्योग सचिव, भीषण गर्मी में बुनकरों के बीच पहुँचे IAS राजेश सिंह राणा
बालोद – छत्तीसगढ़ शासन के ग्रामोद्योग विभाग में नई ऊर्जा और सक्रिय कार्यशैली की झलक उस समय देखने को मिली, जब विभाग के नवनियुक्त सचिव एवं हाथकरघा विभाग के प्रबंध संचालक IAS राजेश सिंह राणा ने पदभार संभालते ही मैदानी स्तर पर कामकाज की समीक्षा शुरू कर दी। जिम्मेदारी ग्रहण करने के तुरंत बाद उन्होंने यह स्पष्ट संकेत दे दिया कि अब विभागीय योजनाओं की निगरानी केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए अधिकारी स्वयं जमीनी स्तर पर उतरेंगे।
इसी क्रम में राजेश सिंह राणा बालोद जिले के गुरूर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पेण्डरवानी पहुँचे, जहाँ उन्होंने परमेश्वरी बुनकर सहकारी समिति का औचक निरीक्षण किया। भीषण गर्मी और तेज धूप के बीच उनका यह दौरा पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना रहा। स्थानीय बुनकरों और ग्रामीणों ने भी सचिव की इस सक्रियता और संवेदनशीलता की सराहना की।

निरीक्षण के दौरान सचिव राणा ने समिति में चल रही बुनाई प्रक्रिया का गहन अवलोकन किया। उन्होंने धागों की उपलब्धता, तैयार कपड़ों की गुणवत्ता, उत्पादन की स्थिति तथा विभागीय उठाव प्रक्रिया की विस्तार से समीक्षा की। खास बात यह रही कि उन्होंने केवल अधिकारियों से जानकारी लेने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि सीधे बुनकरों के बीच बैठकर उनसे संवाद किया और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना।
बुनकरों से चर्चा के दौरान उन्होंने सबसे पहले यह जानना चाहा कि शासन की योजनाओं का लाभ वास्तव में उन्हें समय पर मिल रहा है या नहीं। उन्होंने पूछा कि कपड़ों की सप्लाई नियमित रूप से हो रही है या नहीं तथा विभाग द्वारा तैयार माल का उठाव तय समय पर किया जा रहा है या नहीं। इसके साथ ही उन्होंने भुगतान व्यवस्था की भी विस्तार से समीक्षा की और स्पष्ट रूप से कहा कि मेहनतकश बुनकरों के पारिश्रमिक में किसी भी प्रकार की देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।
बुनकरों ने सचिव को बताया कि कई बार उत्पादन होने के बाद उठाव प्रक्रिया में विलंब होने से भुगतान प्रभावित होता है, जिससे उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस पर सचिव राणा ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि उत्पादन और उठाव के बीच समन्वय बेहतर बनाया जाए ताकि समितियों में स्टॉक लंबित न रहे और बुनकरों को समय पर राशि प्राप्त हो सके।

राजेश सिंह राणा ने कहा, “शासन की प्राथमिकता है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले हमारे बुनकरों को समय पर काम और पारिश्रमिक मिले। व्यवस्था में किसी भी स्तर पर देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
राजेश सिंह राणा ने अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया कि बुनकरों को कच्चे माल, विशेष रूप से धागों की कमी कभी महसूस न हो। उन्होंने कहा कि उत्पादन की निरंतरता बनाए रखने के लिए संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना विभाग की जिम्मेदारी है। यदि किसी समिति में सामग्री की कमी या भुगतान संबंधी शिकायत मिलती है, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
सचिव के इस दौरे से बुनकरों में नई उम्मीद जगी है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय बाद कोई वरिष्ठ अधिकारी सीधे उनके बीच पहुँचा और उनकी समस्याओं को समझने का प्रयास किया। बुनकरों ने उम्मीद जताई कि अब विभागीय कार्यों में तेजी आएगी और उनकी मेहनत का उचित मूल्य समय पर मिल सकेगा।
ग्राम पेण्डरवानी की परमेश्वरी बुनकर सहकारी समिति क्षेत्र की प्रमुख समितियों में से एक मानी जाती है, जहाँ बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवार हाथकरघा कार्य से जुड़े हुए हैं। यह समिति न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध करा रही है, बल्कि पारंपरिक बुनकरी कला को भी जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। ऐसे में सचिव का यह दौरा केवल निरीक्षण भर नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पारंपरिक रोजगार को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है।

राजेश सिंह राणा की कार्यशैली से यह संकेत साफ है कि राज्य सरकार अब ग्रामोद्योग और हाथकरघा क्षेत्र को अधिक सक्रियता और जवाबदेही के साथ आगे बढ़ाने की तैयारी में है। मैदानी स्तर पर अधिकारियों की मौजूदगी और सीधे हितग्राहियों से संवाद की यह पहल आने वाले समय में विभागीय व्यवस्था में बड़े बदलाव का आधार बन सकती है।
पदभार ग्रहण करते ही सचिव का यह एक्शन मोड न केवल विभागीय अमले के लिए स्पष्ट संदेश है, बल्कि प्रदेश के हजारों बुनकर परिवारों के लिए भी भरोसे और उम्मीद की नई शुरुआत माना जा रहा है।

