छत्तीसगढ़ में ऊर्जा क्रांति: नवा रायपुर बनेगा पहली ‘सोलर सिटी’, प्रदेश में देश का पहला बैटरी स्टोरेज सोलर प्लांट
रायपुर – छत्तीसगढ़ ऊर्जा क्षेत्र में एक नई इबारत लिखने की ओर तेजी से बढ़ रहा है। प्रदेश में देश का पहला बैटरी स्टोरेज सोलर प्लांट स्थापित किया जा रहा है, जबकि नवा रायपुर को प्रदेश की पहली ‘सोलर सिटी’ के रूप में विकसित करने की तैयारी भी अंतिम चरण में है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना न केवल राज्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगी, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में कमी लाकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी बड़ा कदम साबित होगी।
मिली जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित सोलर प्लांट में 120 मेगावाट बिजली स्टोरेज की क्षमता होगी। इस तकनीक के जरिए दिन में उत्पादित सौर ऊर्जा को बैटरियों में स्टोर कर रात या जरूरत के समय उपयोग में लाया जा सकेगा। इससे बिजली आपूर्ति अधिक स्थिर और भरोसेमंद बनेगी, खासकर पीक डिमांड के समय।

सरकार की योजना के तहत खदानों और 33/11 केवी सब-स्टेशनों के पास भी बैटरी स्टोरेज सोलर प्लांट विकसित किए जाएंगे। इससे स्थानीय स्तर पर ऊर्जा उत्पादन और खपत के बीच संतुलन बनेगा और ट्रांसमिशन लॉस में कमी आएगी। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल आने वाले समय में पूरे देश के लिए उदाहरण बन सकता है।
नवा रायपुर बनेगा सोलर सिटी
राजधानी के पास स्थित नवा रायपुर को पूरी तरह सौर ऊर्जा आधारित शहर बनाने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। सरकारी भवनों, आवासीय कॉलोनियों और सार्वजनिक स्थलों पर रूफटॉप सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं। साथ ही, सोलर स्ट्रीट लाइट्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग स्टेशन की व्यवस्था भी की जा रही है। इस पहल से शहर की बिजली जरूरतों का बड़ा हिस्सा अक्षय ऊर्जा से पूरा किया जाएगा।
कार्बन उत्सर्जन में आएगी कमी
सौर ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार से प्रदेश में कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है। पर्यावरणविदों के अनुसार, कोयला आधारित ऊर्जा पर निर्भरता घटाने से प्रदूषण कम होगा और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। यह पहल केंद्र और राज्य सरकार के ग्रीन एनर्जी लक्ष्यों के अनुरूप है।
2030 तक बड़ा लक्ष्य
अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने वर्ष 2030 तक कुल ऊर्जा उत्पादन में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए सोलर और अन्य नवीकरणीय स्रोतों में बड़े निवेश किए जा रहे हैं। राज्य सरकार निजी कंपनियों के साथ साझेदारी कर इस क्षेत्र में नई तकनीकों को भी प्रोत्साहित कर रही है।
क्रेडा के CEO राजेश सिंह राणा ने बताया कि राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए तेजी से काम किया जा रहा है और वर्ष 2030 तक इसे नई ऊंचाई पर पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि सौर ऊर्जा के विस्तार का सीधा लाभ ग्रामीण क्षेत्रों को मिल रहा है। अब गांवों में भी सौर ऊर्जा से उत्पादित बिजली पहुंचने लगी है, जिससे वहां के लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो रहा है। खासतौर पर खेती-किसानी में इसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है, जहां बिजली की उपलब्धता बढ़ने से सिंचाई व्यवस्था मजबूत हुई है।

घरों और कॉलोनियों में बढ़ेगा सोलर प्लांट
योजना के तहत आम नागरिकों को भी सोलर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। आवासीय कॉलोनियों में रूफटॉप सोलर प्लांट लगाने पर सब्सिडी दी जा रही है। अनुमान है कि आने वाले वर्षों में हजारों घर सौर ऊर्जा से जुड़ेंगे, जिससे बिजली बिल में कमी के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान मिलेगा।
रोजगार के नए अवसर
इस पूरी परियोजना से प्रदेश में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। सोलर पैनल इंस्टॉलेशन, मेंटेनेंस और बैटरी स्टोरेज सिस्टम के संचालन के लिए कुशल तकनीशियनों की मांग बढ़ेगी। स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित कर इस क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराने की भी योजना है।

विशेषज्ञों की राय
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि बैटरी स्टोरेज सोलर प्लांट भविष्य की जरूरत है। इससे न केवल ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि ग्रिड पर दबाव भी कम पड़ेगा। छत्तीसगढ़ की यह पहल देश के अन्य राज्यों के लिए मॉडल साबित हो सकती है।
नवा रायपुर को सोलर सिटी बनाने और बैटरी स्टोरेज सोलर प्लांट की स्थापना से छत्तीसगढ़ ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा रहा है। यदि यह परियोजना तय समय पर पूरी होती है, तो प्रदेश न केवल अपनी जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि देश में ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में उभरेगा।

