RTE में नर्सरी प्रवेश पर रोक से बवाल, ग़रीब बच्चों के अधिकारों पर कुठाराघात
रायपुर – छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार पर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। स्कूल शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेसी द्वारा सत्र 2026–27 के लिए जारी आदेश, जिसमें आरटीई के तहत कक्षा नर्सरी में ग़रीब छात्रों को प्रवेश न देने का निर्णय लिया गया है, ने राज्यभर में आक्रोश पैदा कर दिया है।
इस आदेश को छत्तीसगढ़ निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सीधे उल्लंघन के रूप में देखा जा रहा है।

नियमों की अनदेखी, संशोधन हेतु आवेदन
शिक्षा अधिकारों को लेकर सक्रिय जन सेवक विकास तिवारी ने इस आदेश को अवैधानिक, नियमविरुद्ध और गरीब विरोधी बताते हुए नियमावलियों के हवाले के साथ संशोधन हेतु औपचारिक आवेदन प्रस्तुत किया है।
जन सेवक विकास तिवारी ने स्पष्ट कहा कि— छत्तीसगढ़ RTE नियम 2010 में वंचित और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा से ही निःशुल्क प्रवेश का अधिकार है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भी प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा (Early Childhood Care & Education) को शिक्षा का अभिन्न हिस्सा मानती है। इसके बावजूद नर्सरी कक्षा को RTE से बाहर करना संविधान की भावना के साथ धोखा है।
भ्रष्ट तंत्र और स्कूल माफिया पर गंभीर आरोप
इस पूरे मामले में भ्रष्ट अधिकारियों और निजी स्कूल माफियाओं की मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि निजी स्कूलों को लाभ पहुंचाने के लिए जानबूझकर ग़रीब बच्चों को शिक्षा के अधिकार से बाहर किया जा रहा है। यदि यह आदेश लागू होता है तो—
लाखों ग़रीब बच्चों का भविष्य अंधकार में चला जाएगा..निजी स्कूल मनमानी फीस वसूलेंगे…“सबको समान शिक्षा” केवल सरकारी भाषणों तक सिमट कर रह जाएगी।

