मुख्य न्यायाधीश के आदेश का पालन: स्कूल शिक्षा सचिव को सौंपे गए 253 पन्नों के दस्तावेज, गरीब बच्चों के हक़ की निर्णायक लड़ाई – विकास तिवारी
( रिपोर्ट – बिप्लव दत्ता )रायपुर – छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर आरोपों को लेकर दायर जनहित याचिका क्रमांक 22/2016 में मुख्य न्यायाधीश द्वारा दिनांक 23 जनवरी 2026 को जारी आदेश का अनुपालन करते हुए आज जन सेवक विकास तिवारी ने स्कूल शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेसी को 253 पन्नों का विस्तृत दस्तावेजी साक्ष्य सौंपा।
यह दस्तावेज उस जिरह और प्रस्तुत तथ्यों से जुड़े हैं, जिनमें राजधानी रायपुर के सुंदर नगर स्थित बिना मान्यता संचालित कृष्णा किड्स एकेडमी स्कूल में एक मासूम बच्ची को शिक्षिका द्वारा अगरबत्ती से जलाए जाने जैसी अमानवीय घटना को उजागर किया गया था।
इतना ही नहीं, याचिकाकर्ता द्वारा यह भी आरोप और प्रमाण प्रस्तुत किए गए कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, रायपुर के एक विंग में साजिश के तहत आग लगाई गई, ताकि गरीब छात्रों के RTE (निःशुल्क शिक्षा अधिकार) से जुड़े दस्तावेज, निजी स्कूलों की मान्यता संबंधी फाइलें,
निःशुल्क पाठ्यपुस्तकों के रिकॉर्ड, तथा फीस नियामक से जुड़े महत्वपूर्ण अभिलेख जलकर नष्ट हो जाएँ।
इन अत्यंत गंभीर तथ्यों पर मुख्य न्यायाधीश ने गहरी चिंता व्यक्त की और स्पष्ट निर्देश दिए कि 10 दिनों के भीतर समस्त दस्तावेज स्कूल शिक्षा सचिव को सौंपे जाएँ, ताकि विभागीय नियमों के तहत उचित एवं कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
आदेश के अनुपालन में आज सभी दस्तावेज सचिव को सौंप दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है।
इस अवसर पर याचिकाकर्ता विकास तिवारी ने कहा कि यह संघर्ष किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के ग़रीब, वंचित, शोषित और आर्थिक रूप से कमजोर लाखों बच्चों के शिक्षा के अधिकार की लड़ाई है।
उन्होंने भावुक शब्दों में कहा— “इस लड़ाई में मेरी जीत, लाखों गरीब बच्चों की जीत होगी और मेरी हार, उनके भविष्य की हार। मैं यह संघर्ष अकेले, अपनी क्षमता से कहीं अधिक मजबूती और त्याग के साथ लड़ रहा हूँ। मैं सभी से प्रार्थना करता हूँ कि दुआओं में इन बच्चों की जीत की कामना करें।” यह मामला अब सिर्फ एक याचिका नहीं, बल्कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही और पारदर्शिता की अग्नि परीक्षा बन चुका है।

