March 6, 2026

RTI बम : 532 सब्सक्राइबर बनाम 3.11 करोड़! छत्तीसगढ़ जनसंपर्क बना ‘दिल्ली दरबार’, स्थानीय मीडिया से सौतेला व्यवहार क्यों?

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( रिपोर्ट – बिप्लव दत्ता ) रायपुर – छत्तीसगढ़ शासन का जनसंपर्क विभाग इन दिनों पत्रकारिता नहीं, दलाली मॉडल पर काम कर रहा है — ऐसा आरोप अब खुलकर सामने आने लगा है। तथ्यों के अनुसार जुलाई 2023 से दिसंबर 2024 के बीच आश्रम चौक, नई दिल्ली स्थित Banyan Infomedia Pvt Ltd को 3 करोड़ 11 लाख रुपये का भुगतान किया गया, जबकि कंपनी के यूट्यूब चैनल पर कुल सिर्फ 532 सब्सक्राइबर हैं। यह आंकड़ा अपने आप में जनसंपर्क विभाग की नीयत, नीति और प्राथमिकताओं पर करारा तमाचा है।

छत्तीसगढ़ी मीडिया की ‘औकात’ कम, दिल्ली वालों की ‘सेटिंग’ भारी?

प्रदेश में दर्जनों ऐसे यूट्यूब चैनल, पोर्टल और अखबार हैं जिनके
10 हजार, 50 हजार, 1 लाख से अधिक सब्सक्राइबर और पाठक हैं।
यही स्थानीय पत्रकार सरकार की योजनाएं सुदूर गांवों, आदिवासी इलाकों और कस्बों तक पहुंचाते हैं। लेकिन जनसंपर्क विभाग का जवाब हमेशा एक ही रहता है —

“बजट नहीं है”
“नीति में नहीं आता”
“अभी संभव नहीं”

और उसी वक्त दिल्ली–मुंबई की कंपनियों पर करोड़ों रुपये लुटा दिए जाते हैं।


क्या कमीशन न दे पाने की सजा मिल रही है?

मीडिया जगत में यह सवाल अब फुसफुसाहट नहीं, खुली चर्चा बन चुका है कि स्थानीय छत्तीसगढ़ी पत्रकार इसलिए बाहर रखे जा रहे हैं क्योंकि वे कथित तौर पर 40% कमीशन की ‘क्षमता’ नहीं रखते। अगर यह गलत है तो जनसंपर्क विभाग साफ बताए — 532 सब्सक्राइबर वाले प्लेटफॉर्म को 3 करोड़ देने का आधार क्या था?

क्या कोई टेंडर, मूल्यांकन रिपोर्ट या प्रभाव आकलन मौजूद है? या फिर “दिल्ली का पता” ही योग्यता बन गया है? जनता का पैसा, जवाबदेही शून्य यह रकम किसी अफसर की जेब से नहीं गई है। यह पैसा गया है — छत्तीसगढ़ के किसानों, आदिवासियों, बेरोज़गारों और करदाताओं की जेब से।

फिर सवाल उठता है —

क्या जनसंपर्क विभाग बिचौलियों का अड्डा बन चुका है? क्या स्थानीय पत्रकारों को जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है? क्या सरकार की जनकल्याण योजनाएं वास्तव में जनता तक पहुंचाने की मंशा है भी या नहीं?


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