छत्तीसगढ़ में एसआईआर प्रक्रिया को भाजपा कर रही है दूषित- दीपक बैज
रायपुर – छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को भाजपा सरकार द्वारा दुर्भावना पूर्वक प्रभावित करके का आरोप लगाते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि बस्तर जैसे नक्सल प्रभावित इलाकों में नक्सल हिंसा और जवाबी कार्यवाही के चलते दशकों से विस्थापित आदिवासियों को एसआईआर प्रक्रिया में “नॉन रेजिडेंस” बताकर बिना नोटिस दिए मतदाता सूची से बाहर करना अन्याय है, अत्याचार है। जनप्रतिनिधि अधिनियम 1950 के प्रावधानों का सीधा उल्लंघन है। बस्तर के लाखों आदिवासी आंध्रा और तेलंगाना में रह रहे हैं, निर्वाचन आयोग इन विस्थापितों की सही पहचान करना ही नहीं चाहती इसलिए बिना नोटिस दिए ही उन्हें सीधे मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया है। संसाधनों की लूट और जंगल कटाई से बस्तर के आदिवासी इस सरकार के खिलाफ हैं, इस लिए बड़ी संख्या में आदिवासी मतदाताओं को मताधिकार में वंचित करने का षडयंत्र किया जा रहा है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता सामने आए हैं, जिनका सत्यापन अब तक पूरा नहीं हो पाया है। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों में ही राज्यभर में लाखों मामलों में अभी भी नोटिस पेंडिंग हैं, 70 प्रतिशत नोटिस के जवाब अब तक नहीं आए हैं, जिन मामलों में नोटिस का जवाब आया भी हैं उन प्रकरणों में सुनवाई और फाइनल निर्णय बाकी है। ऐसे में दावा-आपत्ति की समय-सीमा तत्काल बढ़ाने की आवश्यकता है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि SIR प्रक्रिया में 19 लाख 13 हजार लोगों को विस्थापित बता दिया गया है, यानी बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) इन मतदाताओं तक पहुंचे ही नहीं हैं। मतदाता बीएलओ को खोजते रह गए अब मतदान के अधिकार से वंचित होने का संकट उत्पन्न हो गया है।

