March 7, 2026

इस रफ्तार से नीयत समय में सभी किसान धान नहीं बेच पायेंगे – दीपक बैज

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रायपुर – धान खरीदी की सुस्त व्यवस्था बता रही सरकार किसानों का पूरा धान नहीं खरीदना चाह रही। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि 150 लाख मीट्रिक टन धान इस वर्ष खरीदने का लक्ष्य है, लेकिन जिस धीमी रफ्तार से खरीदी हो रही है। नियत समय में लक्ष्य की पूर्ति नहीं हो पायेगी। सरकार का इरादा ठीक नहीं लग रहा है। प्रदेश के सभी 2739 केंद्रों में खरीदी की रफ्तार बहुत धीमी है, कही जगह की कमी है तो कहीं टोकन की दिक्कत किसान भटक रहे है। लिमिट भी एक बड़ी बाधा बनी हुई है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि धान खरीदी के 50 दिन बाद भी किसान एग्री स्टेक पोर्टल की खामियों के चलते टोकन नही मिलने, रकबा कम होने, धान खरीदी केंद्रों में खरीदी लिमिट नही बढ़ाये जाने एवं खरीदी केंद्रों से धान का उठाव नही होने से बेहद परेशान है, धान खरीद केंद्रों में जाम की स्थिति है, खरीदी बाधित हो रही है। किसान आक्रोशित है, आंदोलन कर रहे है लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। कांकेर जिले के ग्राम बारकोट के किसान 150 किलोमीटर चल कर कलेक्टर से मिले लेकिन उनकी समस्या का कोई संतोषजनक हल नहीं हुआ। लगभग हर गांव में यही समस्या है। ये भाजपा सरकार के द्वारा जानबूझकर रचा गया षड्यंत्र है ताकि किसान धान बेचने से वंचित रहे और सरकार धान बेचने से वंचित किसानों को जिम्मेदार ठहरा कर अपनी जिम्मेदारी से बच सके।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि 50 दिन में जिस प्रकार से धान खरीदी की गई है इससे स्पष्ट है कि तय तारीख में प्रदेश के 27 लाख से अधिक किसान धान नहीं बेच पाएंगे। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान होगा किसान कर्ज में आ जाएंगे और भाजपा की सरकार किसानों को आर्थिक रूप से तंगहाल करना चाहती है भाजपा सरकार चाहती है की किसान हताश और परेशान होकर अपनी उपज को औने पौने दाम पर बिचौलिया के पास बेच दे ताकि भाजपा सरकार किसानों को 3100 रु क्विंटल की दर से भुगतान करने से बचे।धान खरीदी को लेकर जो आंकड़े जारी किए जा रहे है वो संदेहास्पद है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सरकार धान खरीदी केदो में ही ऑफलाइन टोकन किसानों को दे किसानों के पूरे रकबा की धान खरीदी की जाए धान खरीदी की लिमिट बढ़ाई जाए और कस्टम मिलिंग के लिए धान का उठाव तत्काल किया जाये, ताकि सोसायटियों में जगह हो और धान खरीदी सुचारू हो सके।

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