महानदी का अस्तित्व खतरे में: निसदा में अवैध फर्शी खदानों से नदी संकरी, प्रशासन के आदेश बेअसर
(रिपोर्ट – बिप्लव दत्ता )छत्तीसगढ़– रायपुर–महासमुंद सीमा से होकर गुजरने वाली महानदी का अस्तित्व आरंग क्षेत्र के ग्राम निसदा में गंभीर खतरे में है। यहां फर्शी पत्थर खदानों से निकलने वाले वेस्ट पत्थरों को नदी के भीतर और तटों पर डंप किए जाने से कई स्थानों पर महानदी की चौड़ाई करीब 200 मीटर तक सिमट गई है। इससे न केवल नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो रहा है, बल्कि पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है।

निसदा गांव के आसपास महानदी किनारे 8 से 10 फर्शी खदानें संचालित हैं। करीब एक साल पहले जिला प्रशासन ने नियमों के विरुद्ध उत्खनन और नदी तटों पर वेस्ट पत्थर डंप करने के आरोप में इन खदानों को बंद करने के आदेश जारी किए थे। आदेश के बाद कुछ समय तक खदानें बंद रहीं, लेकिन बीते दो महीनों से यहां फिर अवैध रूप से खनन शुरू हो गया है। ठेकेदारों द्वारा पत्थरों का खनन कराने के साथ-साथ मशीनों से कटाई का काम भी कराया जा रहा है, जिससे निकलने वाला मलबा सीधे नदी और तटों पर डंप किया जा रहा है।
इस अवैध गतिविधि के चलते महानदी की चौड़ाई लगातार कम हो रही है। साथ ही सैकड़ों हरे-भरे पेड़-पौधे पत्थरों और मलबे के नीचे दबकर नष्ट हो चुके हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सिलसिला एक साल से नहीं, बल्कि तब से जारी है, जब से खदानों को ठेके पर दिया गया है।
बंद के आदेश के बाद भी अवैध खनन जारी
प्रशासनिक आदेशों के बावजूद कुछ खदानों में खुलेआम अवैध खनन चल रहा है। सोमवार को एक खदान में 50–60 मजदूरों से काम कराया जा रहा था। शिकायत मिलने पर राजस्व, खनिज और पुलिस विभाग की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन टीम के पहुंचने से पहले मजदूर कटर मशीनों सहित अन्य सामान छोड़कर फरार हो गए। इसके बावजूद मौके पर मिली मशीनों को जब्त नहीं किया गया और मामले को जांच में लिया गया है।

स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई, अवैध खनन पर तत्काल रोक और महानदी के प्राकृतिक स्वरूप को बचाने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।

