Exclusive : निसदा गॉव में फर्शी पत्थर माफिया चंद्राकर और साहू सक्रिय, नियमों का हवाला देकर धड़ल्ले से कर रहे है अवैध उत्खनन
( रिपोर्ट – बिप्लव दत्ता ) छत्तीसगढ़ – रायपुर से करीब 38 किलोमीटर दूर आरंग क्षेत्र के ग्राम निसदा में पिछले माह से यहां फिर कुछ खदानों में अवैध रूप से फर्शी पत्थरों का ताबड़तोड़ खनन किया जा रहा है। इन खदानों के ठेकेदारों ने खदानों में पत्थरों का खनन कराने के साथ उन्हें मशीन से काटने का काम भी कराया जा रहा है।

दरअसल निसदा गॉव से हमारे पत्रकार को फोन आया कि यहाँ फर्शी खदान में उत्खनन हो रहा है। इस पर भूपेश एक्सप्रेस की टीम ने जब ग्राउंड जीरो में जाकर जांच पड़ताल किया गया.. तो फर्शी खदान में माज़रा कुछ और देखने को मिला.

एक खदान में करीब 50-60 मजदूरों के माध्यम से अवैध खनन कराया जा रहा था। ये दृश्य जब हमारे कैमेरा में रिकार्ड किया तो मजदूर हड़बड़ाकर इधर- उधर भागने लगे और अपने आकाओं को फोन के माध्यम से सूचना देने लगे। मीडया के कवरेज की सूचना गॉव के लोगो तक पहुँची.. तो ग्रामीण खदान पहुचे. जिसके कुछ देर बाद खदान के मजदूरों और पत्थर माफिया वीरेंद्र चंद्राकर और देवानंद साहू के गुर्गे ने गॉव के लोगो और मीडिया कर्मी को घेर लिया .. देखते ही देखते खदान मजदूर और माफिया, ग्रामीणों से बहस करने लगे। वाद विवाद की स्थिति और गाली गलौच उत्पन्न होने लगी.. वही माफियाओं ने गॉव के एक आदमी मोटरसाइकिल से जा रहा था उसके वाहन को खींचकर उसे नीचे गिरा दिया. और मारपीट पर उतारू हो गए.. जैसे ही मीडिया की नज़र उन माफियाओं पर पड़ी तो वे शांत हो गए..

खनिज अधिकारी, नायाब तहसीलदार और पुलिस की टीम मौके पर पहुँची, मजदूर मशीनें छोड़कर फरार
वही पत्थर माफियाओं की दंबगई को देखते हुए हमारे संवाददाता ने इसकी पूरी जानकारी रायपुर कलेक्टर गौरव सिंह को दी. कलेक्टर ने तत्काल संज्ञान में लिया और खनिज अधिकारी, नायाब तहसीलदार और आरंग थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुँची। लेकिन तब तक सभी मजदूर कटर मशीनों सहित अन्य सामान को छोड़कर फरार हो गए थे।इसके बाबजूद भी जांच करने पहुंची टीम ने मामले को तजदिक किया।

एक माह में कराई जानी थी दोबारा जांच
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जिला प्रशासन के बंद कराने का आदेश के बाद कुछ ठेकेदारों ने इसके विरोध में हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। इस याचिका की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने जिला प्रशासन को निर्देश दिए थे। कि खदानों के गुण-दोष के अनुसार खदानों के बंद करने का निर्णय ले। कोर्ट के आदेश के तहत एक माह के भीतर इस मामले में जांच कर निर्णय लिया जाना था, लेकिन कई महीने बीत चुके हैं, इन खदानों की दोबारा जांच तक नहीं की गई। इस तरह इस मामले में कोर्ट के आदेश का भी पालन नहीं हुआ है।

ग्रामीणों का आरोप, सरपंच-अफसरों के साथ ठेकेदार की सेटिंग
अवैध खदान संचालित होने के विरोध में गांव के लोग लामबंद हो गए हैं। गांव के लोग इसका जमकर विरोध कर रहे हैं। गांव के लोगों ने इस मामले की शिकायत खनिज राजस्व विभाग, प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री, राज्यपाल से लेकर पीएमओ कार्यालय तक कर चुके हैं। इसके बाद भी रोकने के लिए अब तक कारगर कदम उठाया नहीं गया है।

8 से 10 फर्शी खदानें
पत्थर माफियाओं इस कदर सक्रिय है कि निसदा गॉव के आसपास सैकड़ों हरे-भरे पेड़-पौधे को भी नही छोड़े.. जिससे पत्थरों और मलबे के कारण नष्ट हो चुके हैं। यह सिलसिला एक साल से नहीं, बल्कि तब से चल रहा है, जब से यहां की खदानों को खनन के लिए ठेके पर दिया है।


