March 6, 2026

चाचा–भतीजे की करोड़ों की जमीन का विवाद भुईयां एप त्रुटि से गहराया, प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दोनों पक्षों ने रखी अपनी बात*

0
IMG-20251124-WA0004

( रिपोर्ट – शशिकांत सनसनी राजनांदगांव ) – परिवार की करोड़ों की जमीन पर मालिकाना हक को लेकर चाचा–भतीजे के बीच चल रहा विवाद अब प्रशासनिक गलती की वजह से और बढ़ गया है। भुईयां एप में हुई त्रुटि ने परिवार में कलेश बढ़ा दिया है और दोनों पक्ष एक-दूसरे पर सिस्टम का दुरुपयोग किए जाने का आरोप लगा रहे हैं। शनिवार को प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी बातें विस्तार से रखीं। पक्षकार शैलेश जैन ने बताया कि भुईयां एप में हुई गलती के कारण परिवार में गंभीर गलतफहमियां उत्पन्न हुई हैं, जबकि जमीन पर उनका वैधानिक हक स्पष्ट है।

इधर, राजेंद्र जैन और उनके भतीजे शिरीष जैन ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि उन पर लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं। उन्होंने बताया कि—

हम सभी भाई बचपन में (नाबालिग अवस्था में) ही जमीन के हकदार थे

विजय जैन, महेंद्र जैन, मुन्ना जैन, राजेंद्र जैन सभी सहखातेदार हैं

पिता और चाचा को बिना कारण हलधर बताकर भ्रम फैलाया जा रहा है

राजेंद्र जैन ने बताया कि उन्होंने अनुविभागीय अधिकारी (SDM) को आवेदन देकर रिकॉर्ड की त्रुटि सुधारने की मांग की है। ऑनलाइन सुधार प्रक्रिया जारी है।

उन्होंने यह भी खुलासा किया कि वर्ष 1982 में महेंद्र जैन, जो परिवार के बड़े भाई हैं, ने उद्योग स्थापित करने के लिए कुछ भूमि दान स्वरूप दी थी, जिसकी विधिवत नोटरी भी कराई गई थी।

इस पूरे प्रकरण में ऐसा प्रतीत हो रहा है कि भुईयां पोर्टल की त्रुटि का लाभ उठाकर पटवारी, तहसीलदार और राजस्व अधिकारियों को फंसाने की कोशिश की जा रही है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजेंद्र जैन और शिरीष जैन ने साफ कहा—

हम केवल रिकॉर्ड में हुई गलती का सुधार चाहते हैं। परिवार में फूट डालने की कोई कोशिश न हमने की है और न करेंगे। भुईयां एप की गड़बड़ी से प्रदेश में इस तरह का पहला बड़ा विवाद सामने आया है।”

प्रशासनिक स्तर पर यह मामला अब चर्चा का विषय बन चुका है। कलेक्टर और तहसीलदार भी लगातार अपडेट ले रहे हैं। पुलिस के लिए भी यह तय करना चुनौती बन गया है कि किस धाराओं में कार्रवाई की जाए और कौन-से आरोप टिकते हैं।

जमीन विवाद का यह नया प्रकरण अब प्रदेश में बहुचर्चित हो चुका है, और सभी की निगाहें राजस्व विभाग के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed