March 6, 2026

सरकार घोषित करे धान खरीदी 1 नवंबर से तथा 3286 रू. के भाव से होगी – दीपक बैज

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रायपुर – कांग्रेस ने मांग किया है कि सरकार 1 नवंबर से धान खरीदी की घोषणा करे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सरकार की नीयत 15 नवंबर से धान खरीदी करने की है जो कि गलत है धान खरीदी 1 नवंबर से होनी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट घोषणा की जानी चाहिए कि 21 क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से खरीदी होगी। साथ ही धान का कीमत 3100+117+69 कुल 3286 रू. का भुगतान करने का भी घोषणा किया जाए। 2024-25 में किए गए एमएसपी में वृद्धि 117 तथा 2025-26 में किए गए एमएसपी में वृद्धि 69 को जोड़कर कुल 3286 रुपए प्रति क्विंटल होता है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सरकार अति वर्षा से हुए किसानों के नुकसान का भी आकलन कर उसकी क्षतिपूर्ति मुआवजे की घोषणा भी तत्काल करे, ताकि वर्षा के कारण हुए फसल नुकसान में कुछ मदद मिल सके।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि धान खरीदी के लिए अनिवार्य किए गए एग्री स्टेक पोर्टल में पंजीयन बंद हो गया। अभी तक पूरे किसानों का पंजीयन नहीं हुआ है, पिछले साल के मुकाबले लाखों किसान पंजीयन से वंचित है। एग्री स्टेक पोर्टल में आने वाली दिक्कतों पोर्टल बंद रहने, डाटा की गड़बड़ियों खसरा खतौनी में मिलान नहीं होने से बहुत से किसानों का पंजीयन नहीं हो पाया है। कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि पोर्टल में पंजीयन की तिथि और बढ़ाई जाए। जिनका पंजीयन पोर्टल से नहीं हो रहा उनका पंजीयन सोसायटियों में करने की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि जिन किसानों ने धान बेचने के लिए एग्री स्टेक पोर्टल में पंजीयन करवा लिया है सरकार ने उनके लिए नया नियम बना दिया कि उन्हें अब सोसायटियों में रकबा सत्यापन कराना होगा। गिरदावरी डिजिटल क्राप सर्वे के बाद भी रकबा सत्यापन करने किसानों को परेशान करने के लिए अनिवार्य किया गया है। सरकार को किसानों पर भरोसा नहीं है किसान झूठ बोलकर धान बेचेंगे क्या? सरकार किसानों का पूरा धान खरीदना नहीं चाहती इसलिए तमाम नियम कायदे बना कर परेशान किया जा रहा है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार दुर्भावना पूर्वक किसानों के लिए लगातार कठिनाई पैदा कर रही है ताकि समर्थन मूल्य पर कम से कम धान खरीदना पड़े। पूरे प्रदेश में खाद बीज का संकट है, दुगुने-तिगुने दाम पर डीएपी और यूरिया की कालाबाजारी सर्वविदित है। अब एग्री स्टैक पोर्टल में पंजीयन की अनिवार्यता और प्रक्रियागत खामियों के चलते खुद ही समस्या पैदा करके समर्थन मूल्य में धान खरीदी से बचना चाह रही सरकार पिछले वर्ष के धान का निराकरण नहीं कर पाई है सरकार एक साल में ही 3100 में धान खरीदने में हांफ गई है।

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