सामाजिक कार्यकर्ता विकास तिवारी की शिकायत से मचा बवाल, रायपुर DEO ऑफिस में रिकॉर्ड जलने के मामले की EOW-ACB जांच की मांग
रायपुर – जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय में मान्यता शाखा के महत्वपूर्ण सरकारी रिकॉर्ड आग में जलने का मामला अब बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक विस्फोट बनता जा रहा है। शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली, निजी स्कूलों की मान्यता प्रक्रिया और करोड़ों-अरबों रुपये के RTE भुगतान पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आग में वही रिकॉर्ड नष्ट हुए हैं, जिनमें पिछले लगभग 10 वर्षों के निजी स्कूलों से जुड़े संवेदनशील दस्तावेज शामिल बताए जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार DEO कार्यालय की मान्यता शाखा में रखी गई मूल नस्तियां, फाइलें और अभिलेख आग की भेंट चढ़ गए। इसके बाद शिक्षा विभाग ने आनन-फानन में लगभग 850 निजी विद्यालयों को पत्र जारी कर वर्ष 2016-17 से लेकर 2025-26 तक के दस्तावेज दोबारा जमा करने के निर्देश दिए हैं। इन दस्तावेजों में स्कूलों की मान्यता, नवीनीकरण, निरीक्षण रिपोर्ट, आय-व्यय विवरण, वित्तीय रिकॉर्ड और शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत हुए भुगतान से संबंधित फाइलें शामिल हैं।
यही नहीं, जिन रिकॉर्ड के जलने की बात कही जा रही है, वे करोड़ों-अरबों रुपये के सरकारी भुगतान और निजी स्कूलों की वैधता से सीधे जुड़े हुए थे। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी संवेदनशील फाइलें सुरक्षित क्यों नहीं रखी गईं? क्या यह महज दुर्घटना है या फिर किसी बड़े घोटाले के सबूत मिटाने की साजिश?

मामले को और गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि इससे पहले भी जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से मान्यता संबंधी रिकॉर्ड गायब होने की शिकायतें पुलिस विभाग और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच चुकी थीं। बावजूद इसके अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लगातार रिकॉर्ड गायब होना और अब आग में अभिलेख जल जाना कई गंभीर संदेह पैदा कर रहा है।
इस पूरे विवाद के केंद्र में जिला शिक्षा अधिकारी हिमांशु भारतीय का नाम भी चर्चा में है। उन पर निजी विद्यालयों की मान्यता में अनियमितताओं के आरोप पहले से लगते रहे हैं। विधानसभा में भी स्कूल शिक्षा मंत्री ने इस मामले में जांच चलने की बात स्वीकार की थी। ऐसे में अब रिकॉर्ड जलने की घटना ने पूरे प्रकरण को और ज्यादा संदिग्ध बना दिया है।
सामाजिक कार्यकर्ता विकास तिवारी ने इस मामले को लेकर बड़ा हमला बोला है। उनका कहना है कि यह सिर्फ आगजनी की घटना नहीं बल्कि शिक्षा विभाग में वर्षों से चल रहे भ्रष्टाचार, फर्जीवाड़े और रिकॉर्ड प्रबंधन की पोल खोलने वाला मामला है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो करोड़ों रुपये के घोटाले हमेशा के लिए दफन हो सकते हैं।

विकास तिवारी ने पुलिस कमिश्नर, आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) को शिकायत सौंपकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। शिकायत में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि आगजनी की घटना की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि आखिर रिकॉर्ड जलने के पीछे कौन लोग जिम्मेदार हैं।
साथ ही मांग की गई है कि जो रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा अभी उपलब्ध हैं, उन्हें तत्काल सुरक्षित किया जाए ताकि किसी और सबूत से छेड़छाड़ न हो सके। RTE भुगतान और निजी स्कूल मान्यता प्रक्रिया का विशेष ऑडिट कराने की भी मांग उठाई गई है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि पिछले 10 वर्षों के रिकॉर्ड की गहन जांच हो जाए तो शिक्षा विभाग के कई बड़े राज सामने आ सकते हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर करोड़ों रुपये के भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड का कोई सुरक्षित डिजिटल बैकअप क्यों नहीं था? यदि था तो अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया? क्या विभाग किसी बड़े खुलासे से बचने की कोशिश कर रहा है? इन सवालों ने पूरे शिक्षा विभाग को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अब इसे लेकर जनहित याचिका (PIL) दायर करने की तैयारी भी शुरू हो गई है। यदि यह मामला अदालत पहुंचता है तो शिक्षा विभाग के कई अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वहीं विपक्ष को भी सरकार पर हमला बोलने का नया मुद्दा मिल गया है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस पूरे मामले में क्या कदम उठाती है। क्या सचमुच निष्पक्ष जांच होगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा? लेकिन इतना तय है कि DEO कार्यालय में रिकॉर्ड जलने की घटना ने रायपुर के शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा दिया है और आने वाले दिनों में यह मामला बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक तूफान खड़ा कर सकता है।

