“भ्रष्टाचार के ‘वन सम्राट’ पर राजनीतिक कवच?”प्रधान मुख्य वन संरक्षक वी. श्रीनिवास राव के सेवा विस्तार पर छिड़ा घमासान, मुख्यमंत्री को खुला चुनौती पत्र“जनता देख रही है… सरकार भ्रष्टाचार के साथ है या उसके खिलाफ?”
रायपुर – छत्तीसगढ़ की नौकरशाही और सत्ता के गलियारों में उस वक्त राजनीतिक भूचाल आ गया, जब अखिल भारतीय जनसंघ के प्रदेश महामंत्री प्रतीक पाण्डेय ने प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को एक तीखा और विस्फोटक पत्र लिखकर वर्तमान प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख वी. श्रीनिवास राव को सेवा विस्तार नहीं दिए जाने की मांग कर दी।
31 मई 2026 को सेवानिवृत्त होने जा रहे वी. श्रीनिवास राव पर भ्रष्टाचार, विभागीय अनियमितताओं और पद के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए प्रतीक पाण्डेय ने सीधे-सीधे सवाल दागा है कि आखिर सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़ी है या फिर भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण देने में लगी हुई है?
यह पत्र सामने आते ही वन विभाग, राजनीतिक गलियारों और प्रशासनिक महकमे में सनसनी फैल गई है। पत्र में दावा किया गया है कि वी. श्रीनिवास राव अपने पूरे कार्यकाल में “अकूत भ्रष्टाचार” और “विभागीय अनियमितताओं” के आरोपों से घिरे रहे हैं। आरोप यह भी लगाया गया कि जनता के धन से अर्जित कथित संपत्ति और राजनीतिक संरक्षण के दम पर उन्होंने छत्तीसगढ़ में “बेताज बादशाह” की तरह अपना साम्राज्य खड़ा कर लिया।

प्रतीक पाण्डेय ने अपने पत्र में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के उस पत्र का भी उल्लेख किया है, जिसमें कथित रूप से वित्तीय अनियमितताओं और संदिग्ध मामलों की ओर संकेत किया गया है। यही नहीं, पत्र में यह तक कहा गया कि श्रीनिवास राव के खिलाफ सामने आए मामले “सिर्फ एक प्रतिबिंब” हैं और असल भ्रष्टाचार इससे कहीं अधिक बड़ा हो सकता है।
सबसे बड़ा राजनीतिक विस्फोट तब हुआ जब पत्र में यह आरोप लगाया गया कि भारतीय जनता पार्टी के पिछले 15 वर्षों के एक “कद्दावर नेता” का संरक्षण वी. श्रीनिवास राव को प्राप्त है और इसी राजनीतिक ताकत के चलते उन्हें सेवा विस्तार दिलाने की तैयारी चल रही है।
यह आरोप सामने आते ही सत्ता के भीतर हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक जानकार इसे सीधे-सीधे सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी छवि पर हमला मान रहे हैं।
पत्र में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से बेहद तीखे शब्दों में पूछा गया है—
“आप भ्रष्टाचार के साथ हैं अथवा भ्रष्टाचार के विरुद्ध?”
यह सवाल अब सिर्फ एक अधिकारी के सेवा विस्तार का नहीं रह गया, बल्कि सरकार की नीयत, नीति और भ्रष्टाचार के खिलाफ उसकी वास्तविक प्रतिबद्धता पर जनबहस बनता जा रहा है।
प्रतीक पाण्डेय ने अपने पत्र में लिखा है कि यदि इतने गंभीर आरोपों से घिरे अधिकारी को सेवा विस्तार दिया जाता है, तो इससे जनता के बीच बेहद नकारात्मक संदेश जाएगा। उन्होंने कहा कि यह निर्णय न केवल सुशासन की छवि को नुकसान पहुंचाएगा, बल्कि ईमानदार अधिकारियों का मनोबल भी तोड़ देगा।
राजधानी रायपुर में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार वी. श्रीनिवास राव को सेवा विस्तार देती है, तो विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बना सकता है। वहीं यदि सेवा विस्तार रोका जाता है, तो यह सत्ता के भीतर प्रभावशाली लॉबी के लिए बड़ा झटका माना जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक, वन विभाग में लंबे समय से कई बड़े फैसलों और परियोजनाओं को लेकर अंदरूनी असंतोष बना हुआ है। कई अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच यह चर्चा रही है कि विभाग में निर्णय लेने की प्रक्रिया कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित हो गई थी। अब प्रतीक पाण्डेय के पत्र ने उन चर्चाओं को खुली बहस में बदल दिया है।
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा उस पंक्ति की हो रही है जिसमें लिखा गया— “जनता यह देखना चाहती है कि मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार के साथ खड़े हैं या उसके दमन हेतु संकल्पित।”
राजनीतिक तौर पर यह बयान बेहद विस्फोटक माना जा रहा है, क्योंकि यह सीधे मुख्यमंत्री की छवि और निर्णय क्षमता को चुनौती देता है।
उधर, अभी तक न तो मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आई है और न ही वी. श्रीनिवास राव ने इन आरोपों पर सार्वजनिक जवाब दिया है। लेकिन पत्र वायरल होने के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक दफ्तरों तक इस मुद्दे पर जबरदस्त चर्चा शुरू हो चुकी है।
प्रदेश की राजनीति में यह मामला आने वाले दिनों में बड़ा तूफान खड़ा कर सकता है। अब सबकी निगाहें मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के अगले फैसले पर टिक गई हैं।
क्या सरकार भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे अधिकारी को सेवा विस्तार देगी?
क्या राजनीतिक संरक्षण सचमुच इतना मजबूत है?
या फिर सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा संदेश देने जा रही है?
इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ की राजनीति और प्रशासन दोनों की दिशा तय कर सकते हैं।

